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वन मंत्री केदार कश्यप ने औषधि किसानों को दिया हरेली का उपहार, औषधि पौधों की खेती के लिए 54.36 लाख की अग्रिम राशि वितरित

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                    11 अगस्त को बोर्ड कार्यालय सभागार राज्य वन अनुसंधान भवन प्रथम तल जीरो पॉइंट बलौदा बाज़ार रोड रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के तहत औषधि पौधों की खेती करने वाले किसानों को अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहे, कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की तथा कार्यक्रम में बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला विशेष उपस्थिति के साथ-साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में धरसीवा विधायक अनुज शर्मा उपस्थित रहें।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और छत्तीसगढ़ महतारी पूजा अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात माननीय मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप का स्वागत बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, बोर्ड के सीईओ श्री जे.ए.सी.एस.राव ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार की गई खस की माला तथा पुष्प गुच्छ देकर किया गया।

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स्वागत उपरांत कार्यक्रम में सर्वप्रथम बोर्ड के सीईओ श्री जे.ए.सी.एस.राव ने बोर्ड द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी। उन्होंने यह बताया कि बोर्ड द्वारा औषधि पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रहा हैं। बोर्ड किसान की सुलभता हेतु औषधि पौधों की खेती के लिये औषधि पौधे निशुल्क उपलब्ध कराता है साथ ही उपज की बाय-बैक की व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।

तत्पश्चात बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि वनौषधियों की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोरोना काल में हमने देखा है कि शहरों की अपेक्षा गांवों में कोरोना का असर कम हुआ, इसका कारण यह है कि ग्रामीण आज भी हमारी प्राचीन दैनिक जीवन चर्या, स्वास्थ्य परंपरा तथा प्राचीन भोजन परंपरा में वनौषधियों का सेवन करते हैं। उन्होंने बताया कि वे प्राकृतिक शुगर फ्री स्टीविया का रोजाना इस्तेमाल करते हैं, जिसका परिणाम बहुत अच्छा है, इसीलिए बोर्ड वनौषधियों की खेती के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

इसके उपरांत बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने अपने उद्बोधन में बताया कि बोर्ड माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं माननीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन, स्वास्थ्य परंपराओं, उपचार पद्धतियों, पारंपरिक ज्ञान संरक्षण, वैद्यों के क्षमता विकास और किसानों के आर्थिक उत्थान के लिए औषधि पौधों की खेती के माध्यम से दिन-रात काम कर रहा है। बोर्ड ने छत्तीसगढ़ में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी लगभग 50 वनौषधियों की भी पहचान कर उनके संरक्षण संवर्धन पर कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी जिले से आये हुए किसानों एवं स्व सहायता समूहों को औषधि पौधों की खेती को चुनने के लिए बधाई दी तथा हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि आज पूरा विश्व 2026 वर्ष को महिला कृषक दिवस के रूप में मना रहा है, छत्तीसगढ़ में बोर्ड ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, औषधि पौधों की खेती में जुड़े अधिकतर कृषक महिलाएं हैं, इसके लिए उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला एवं सीईओ श्री जे.ए.सी.एस.राव को बधाई दी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य परंपराओं को मान्यता देते हुए छत्तीसगढ़ के वैद्य श्री हेमचंद जी को पद्मश्री देकर छत्तीसगढ़ के आदिवासी तथा स्वास्थ्य परंपराओं को एक नई पहचान दी है।

वनमंत्री जी ने कहा कि औषधि पौधों की खेती छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक वरदान के समान है, क्योंकि इसमें धान से बहुत कम पानी लगता है, और इसकी सुरक्षा तथा कीटनाशकों में लगने वाला पैसा पूरी तरीके से बच जाता है। बोर्ड खेतों की मेड़ों पर गटारन लगाकर किसानों की अतिरिक्त कमाई के साधन भी उपलब्ध करा रहा हैं। कल हरेली अमावस है इसका महत्व छत्तीसगढ़ में कितना है, आप सभी जानते हैं यह छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन पारंपरिक त्योहार जिसमें छत्तीसगढ़ के किसान अपने खेतों में शतावर, केवकंद, रसना तथा तेंदू को अपने खेतों में लगाते हैं, सभी आमजन नीम की पत्तियों को अपने मुख्य द्वार पर लगाते हैं, आज छत्तीसगढ़ शासन की ओर से हरेली तिहार के मौके पर औषधि पौधों की खेती करने वाले किसानों को अग्रिम राशि के रूप में हरेली तिहार का उपहार दिया जा रहा हैं।
इसके बाद माननीय मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन वन मंत्री श्री केदार कश्यप, बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम एवं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के कर कमलों से नारायणपुर (अबूझमाड़) के 25 किसान और धमतरी जिले के 18 किसान तथा 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की गयी।

यह पूरी राशि बोर्ड द्वारा अनुबंधित संस्थाओं सीजी स्टीविया तथा इंस्टा हर्बल द्वारा अग्रिम प्रोत्साहन राशि के रूप में दी गई, जिससे कि किसानों को बिना किसी आर्थिक परेशानी के औषधि पौधों की खेती को शुरू कर सकेंगे। बोर्ड की यह योजना छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आर्थिक उत्थान के लिए मील का पत्थर बनेगी।

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