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पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ केस में बड़ा एक्शन, कर्नाटक हाई कोर्ट ने POCSO मामले में येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

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Big action in POCSO case against former CM BS Yeddyurappa, Karnataka High Court stays arrest of Yeddyurappa in POCSO case

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता बीएस. येदियुरप्पा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कारण, बेंगलुरु की एक कोर्ट ने गुरुवार को उनके खिलाफ POCSO मामले में गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. ऐसे में उनकी गिरफ्तारी हो सकती है. CID की विशेष जांच टीम ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग करते हुए फर्स्ट फास्ट ट्रैक कोर्ट का रुख किया था, क्योंकि वे बुधवार को पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे. येदियुरप्पा ने जांच में शामिल होने के लिए समय मांगा था.

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बीजेपी के दिग्गज नेता, जो पार्टी के संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं, वर्तमान में दिल्ली में हैं और उनके लौटने के बाद जांच में शामिल होने की संभावना है. वहीं वारंट जारी होने के बाद उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी है, जिस पर कल शुक्रवार को सुनवाई होगी.

पुलिस के मुताबिक, येदियुरप्पा पर यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 A (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया था. यह मामला 17 वर्षीय लड़की की मां की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने आरोप लगाया था कि इस साल 2 फरवरी को एक मीटिंग के दौरान येदियुरप्पा ने उसकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया.

कोर्ट ने गिरफ्तारी पर उठाया सवाल

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस एस कृष्ण दीक्षित ने बीएस येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया. कोर्ट राज्य सराकर के उस आरोप से सहमत नहीं था, जिसमें कहा गया कि येदियुरप्पा ने 11 जून को जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने के लिए जारी नोटिस की अनदेखी की और फिर कुछ ही घंटों में दिल्ली चले गए थे. इस पर एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने तर्क दिया कि नोटिस जारी के बाद बीएस येदियुरप्पा ने प्लेन का टिकट बुक कराया था.

वह कोई टॉम, डिक या हैरी नहीं हैं- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि बीएस येदियुरप्पा पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उनके भागने की संभावना नहीं है. कोर्ट ने कहा, “वह (बीएस येदियुरप्पा) कोई टॉम, डिक या हैरी नहीं हैं. वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं. क्या आपका कहना है कि वह देश छोड़कर भाग जाएंगे? वह बेंगलुरू से दिल्ली आकर क्या कर सकते हैं?” कोर्ट ने यह भी कहा कि येदियुरप्पा ने 11 जून के नोटिस का जवाब देते हुए कहा था कि वह 17 जून को जांच अधिकारी के सामने पेश होंगे.
कोर्ट ने मामले की वास्तविकता पर उठाया सवाल

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले की वास्तविकता पर भी सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से चीजें घटित हुई हैं, उससे संदेह है कि इस मामले में कुछ छिपा हुआ है. इसका उत्तर देते हुए एजी ने कहा कि कुछ भी छिपा नहीं है.

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा, “यहां एक पूर्व मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने पहले ईमानदारी से नोटिस का पालन किया. इसके बाद आपने एक और नोटिस जारी किया, जो आपका विशेषाधिकार है. बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि मैं 17 जून को आऊंगा. वो लिखित में ये देने किलिए तैयार हैं कि वह वापस आ रहे हैं, लेकिन फिर भी आप उन्हें गिरफ्तार करना चाहते हैं.”

बीएस येदियुरप्पा की ओर से पेश हुए वकील सी.वी. नागेश ने कोर्ट के बताया कि शिकायतकर्ता, जो पीड़िता की मां है, उन्हें छोटे-छोटे मामले दायर की आदत है, जिससे बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया.

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