CG: Patwaris’ strike ends, now there will be no problem on revenue related matters, minister gave information after the meeting with the Revenue Minister…
रायपुर, 18 जुलाई 2024 छत्तीसगढ़ में 8 जुलाई से जारी पटवारियों की हड़ताल आज राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से मुलाकात के बाद खत्म हो गई । दरअसल, पटवारी अपनी 32 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे, ऐसे में पूरे प्रदेश में छात्रों के साथ आमजन को भी काफी समस्याएं का सामना करना पड़ रहा था । आज पटवारी संघ ने टंकराम वर्मा से मुलाकात की और ठोस आश्वासन मिलने के बाद अपनी हड़ताल खत्म कर दी । जानकारी के मुताबिक आज से ही सभी पटवारी काम पर वापस लौट जायेंगे।

आपको बता दें कि आज से काम पर पटवारी लौटेंगे। पिछले 11 दिनों से प्रदेश भर के पटवारी हड़ताल पर थे, जिसकी वजह से काम काफी प्रभावित हो रहा था। 32 बिंदुओं को लेकर पटवारी प्रदर्शन कर रहे थे। पटवारियों से मुलाकात के बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि पटवारी अब काम पर लौटेंगे। पहले भी बताया है कोई बड़ी बात नहीं है,छोटी सी बात थी अब उस पर सहमति बन गई है और अब पटवारी संघ अपने काम पर वापस लौटेंगे। संसाधन भत्ता देने की मांग थी, जो पूर्ववर्ती सरकार ने कहा था इस पर बात नाराजगी थी। पहले भी चर्चा हुई थी पर सार्थक निर्णय नहीं आया था। अब सहमति बन गई है।
भुइंया पोर्टल में गड़बड़ी की बात
पटवारियों की सरकार से शिकायत है कि उन्हें जरूरी सुविधा नहीं दी जाती है । ऑनलाइन नक्शा बटांकन में संशोधन सीधे पटवारी की आईडी से होनी चाहिए, जो अभी नहीं होती है. जिला स्तर पर सहायक प्रोगामरों की पदस्थापना की जानी चाहिए । साथ ही, भूमि खरीद-बेच में रजिस्ट्री के साथ ही भुइंया पोर्टल पर भी इसे अपडेट किया जाना चाहिए. किसान की कर्ज लेने बैंक में काट लेने के बाद भी भुइंया पोर्टल में बंधक नहीं हटाया जाता है, उसे स्वतः हटाने का प्रावधान होना चाहिए ।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में 5 हजार से ज्यादा पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये थे। पटवारियों द्वारा हड़ताल करने की वजह से राजस्व विभाग के सभी कामकाज ठप हो गये। प्रदेशभर में पटवारियों ने ये आंदोलन राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की अपील को ठुकराते हुये 8 जुलाई से 32 सूत्रीय मांगों को लेकर नया रायपुर धरना स्थल में शुरू किया था। साथ ही अलग अलग जिलों में भी ये प्रदर्शन जारी था।
जानिए संघ ने क्या कहा था
संघ का कहना है कि ऑफिस में ऑनलाइन कामों के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर, स्कैनर जैसे अन्य सुविधाएं उन्हें नहीं मिल रही है। डिजिटल हस्ताक्षर 100 प्रतिशत करने के लिए शासन स्तर पर दबाव बनाया जाता है। पटवारी अपने खर्च से ही डिजिटल टोकन बनाते हैं, इसके बाद भी अधिकारियों द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। आनलाइन रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण के लिए पटवारी की आईडी में आता है, जिसमें क्रेता-विक्रेता से संबंधित सारी जानकारी अंग्रेजी में रहती है। जिसे हिंदी में टाइप करना पड़ता है। लिपिकीय त्रुटि हो सकती है, जिसके लिए पटवारी को ही दोषी समझा जाता है। इनका आरोप ये भी है कि शासन की तरफ से न तो उन्हें नेट भत्ता दिया जाता है और न ही आवश्यक संसाधन दिया जा रहे है।
पटवारियों ने ये भी मांग की है कि भूमि, खरीद-बेच में रजिस्ट्री के साथ ही भुइंया पोर्टल पर भी इसे अपडेट किया जाना चाहिए। ऑनलाइन नक्शा, बटांकन, संशोधन पहले पटवारी आईडी में संशोधित कर राजस्व निरीक्षक की आईडी में भेजा जाता है। अगर राजस्व निरीक्षक की आईडी से अनुमोदन नहीं होता है, तो उसी नक्शे से संबंधित अन्य बटांकन या संशोधन नहीं करने मिलता है, जिसके कारण बेवजह विलंब होता है।



