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हाईकोर्ट का निर्देश, बिलासपुर में नाइट लैंडिंग का रास्ता साफ,एयरपोर्ट पर डीवीओआर उपकरण लगाने सरकार तैयार,एक साल से लटका था मामला

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High Court’s direction, way cleared for night landing in Bilaspur, government ready to install DVOR equipment at the airport, the matter was pending for a year

Bilaspur Airport: बिलासपुर। बिलासा एयरपोर्ट में विमानों के नाइट लैंडिंग के लिए उपकरण व तकनीक को लेकर राज्य शासन ने अपनी जिद छोड़ दी है। गुरुवार को डिवीजन बेंच के समक्ष केंद्र व राज्य शासन के अधिवक्ताओं ने जानकारी दी कि बिलासा एयरपोर्ट में डीवीओआर उपकरण और टेक्नालाजी का प्रयोग किया जाएगा। पूर्व में राज्य शासन ने नाइट लैंडिंग के लिए सैटेलाइट आधारित पीबीएन टेक्नालाजी लगाने पर अड़ा हुआ था। इसके चलते पूरे 10 महीने का विलंब हो गया है।

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बिलासा एयरपोर्ट में सुविधाओं की मांग को लेकर हाई कोर्ट अधिवक्ता संदीप दुबे व बिलासपुर निवासी कमल दुबे ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। दोनों याचिकाओं पर कोर्ट में एकसाथ सुनवाई हो रही है। गुरुवार को जस्टिस गौतम भादुड़ी व जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच में जनहित याचिका पर सुनवाई प्रारंभ हुई। केंद्र व राज्य शासन के जवाब के बाद हाई कोर्ट ने नाइट लैंडिंग के लिए तेजी के साथ काम करने का निर्देश दिया। सेना से जमीन वापसी के संबंध में जानकारी मांगी। कोर्ट ने 29 जुलाई से सीमांकन का काम प्रारंभ करने और दो सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने की बात कही। जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस राधाकिशनअग्रवाल के कड़े रुख और सार्थक दखल से बिलासपुर एयरपोर्ट के विकास का मार्ग प्रशस्त होते दिखाई दे रहा है। 19 जून को जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच नाइट लैंडिंग के लिए एयरपोर्ट में नई व पुरानी तकनीक आधारित उपकरण लगाने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी। इस पर डिवीजन बेंच ने केंद्र व राज्य शासन के अधिकारियों,सिविल एविएशन के अफसरों की संयुक्त बैठक बुलाकर इस दिशा में काम करने का निर्देश दिया था।
लगभग एक साल से केंद्र और राज्य के बीच एयरपोर्ट में नाइट लैंडिंग के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग पर मतभेद के कारण मामला अटका था। 19 जून को सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य की संयुक्त बैठक बुलाकर मामले को हल करने के निर्देश दिए थे।

आखिरकार, राज्य को वही निर्देश मानने पड़े जो केंद्र ने अपने 18 अप्रैल के पत्र में दिए थे। उस निरर्थक बहस के कारण हुए समय के नुकसान की भरपाई के लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वह केंद्र सरकार की एजेंसी के साथ मिल कर जल्दी से जल्दी डीवीओआर आदि उपकरणों के स्थापना की प्रक्रिया शुरू करे।
सेना के कब्जे वाली जमीन एयरपोर्ट को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया लंबित रहने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और जिला प्रशासन के उस पत्र को स्वीकार किया, जिसमें पटवारी हड़ताल और बारिश को सीमांकन ना हो पाने का आधार बनाया गया था।

कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट की भूमि कोई कृषि भूमि नहीं है और भू-राजस्व संहिता के हिसाब से तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारी भूमि का सीमांकन कर सकते हैं। कोर्ट ने 29 जुलाई को सीमांकन प्रारम्भ करने और दो सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने बाउंड्री वॉल तोड़ने की अनुमति अभी तक नहीं मिलने पर ब्यूरो ऑफ़ सिविल एविएशन सिक्योरिटी को नोटिस भी जारी किया है।

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