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उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,Live-in Relationship में रह रहे जोड़े ने नैनीताल हाईकोर्ट से मांगी सुरक्षा तो अदालत ने कहा- ‘पहले UCC के तहत रजिस्‍ट्रेशन कराओ’

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Big decision of the High Court after the implementation of UCC in Uttarakhand, when the couple living in a live-in relationship sought protection from the Nainital High Court, the court said – ‘First get registered under UCC’

याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में फरियाद की थी कि वह अलग-अलग धर्म से जुड़े हुए हैं और लिविंग रिलेशनशिप में रह रहे है. जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी. इस पर सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने बताया कि उत्तराखंड में UCC के तहत लिविंग रिलेशनशिप के एक महीने के अंदर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के प्रावधान हैं.

Ro.No - 13672/140

याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी सुरक्षा
जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 48 घंटे के भीतर लिव इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन करने का आदेश दिया इसके साथ ही एसएचओ दालनवाला देहरादून को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए. कोर्ट ने दोनों को अगले छह हफ्ते तक सुरक्षा के आदेश दिए हैं. इसके बाद भी उन दोनों पर खतरे का मूल्यांकन किया जाएगा. जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. यूसीसी में लिव इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों को भी रजिस्ट्रेशन कराने का प्रावधान हैं.

उत्तराखंड में इसी साल लोकसभा चुनाव से पहले मार्च में महीने में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया था. इसके बाद उत्तराखंड देश का पहला राज्य हैं, जहां यूसीसी लागू है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस लागू करते वक्त बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा था कि समान अधिकार मिलने से महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न पर भी लगाम लगेगी. यूसीसी बीजेपी के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा है. उत्तराखंड में बीजेपी के दोबारा सरकार बनने के बाद सीएम धामी ने कमेटी का गठन किया था जिसने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार किया था.

माता-पिता और भाई ने धमकी दी
भट्ट ने आगे कहा कि यूसीसी से संबंधित हिस्से को हटाने के अनुरोध के साथ शनिवार को एक रिकॉल एप्लीकेशन दाखिल की जाएगी। हाईकोर्ट का यह आदेश 26 वर्षीय हिंदू महिला और 21 वर्षीय मुस्लिम पुरुष की ओर से दाखिल की गई याचिका में दिया गया है, जो कुछ समय से साथ रह रहे थे।

जोड़े ने अदालत को सूचित किया कि वे दोनों वयस्क हैं, अलग-अलग धर्मों से संबंधित हैं, और लिव-इन रिलेशनशिप में एक साथ रह रहे हैं, जिसके कारण एक के माता-पिता और भाई ने उन्हें धमकी दी।

उत्तराखंड यूसीसी की धारा 378 (1) का हवाला
उप महाधिवक्ता जेएस विर्क व आरके जोशी ने सरकार का प्रतिनिधित्व करते उत्तराखंड यूसीसी की धारा 378 (1) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि “राज्य के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले भागीदारों के लिए, उत्तराखंड में उनके निवास की स्थिति के बावजूद, धारा 381 की उप-धारा (एक ) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का विवरण रजिस्ट्रार को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिसके अधिकार क्षेत्र में वे रह रहे हैं।

यदि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले भागीदार ऐसे रिश्ते की शुरुआत से एक महीने के भीतर अपने रिश्ते को पंजीकृत करने में विफल रहते हैं, तो वे अधिनियम की धारा 387 (1) के तहत दंड के अधीन होंगे।”

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