Waqf property has doubled in 13 years, Waqf Board has made a lot of wealth by misusing the law, now Modi government will reduce the powers of the board
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों को सीमित करने की योजना पर काम कर रही है. इसके लिए सरकार वक्फ अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस द्वारा वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधनों के बाद भू-माफिया की तरह काम करने, व्यक्तिगत भूमि, सरकारी भूमि, मंदिर की भूमि और गुरुद्वारों सहित विभिन्न प्रकार की संपत्तियों को जब्त करने का आरोप लगाया गया है. व्यक्तिगत संपत्ति से लेकर सरकारी जमीन तक और मंदिरों की जमीन से लेकर गुरुद्वारों तक, वक्फ बोर्ड हाल के समय में जमीन माफिया की तरह व्यवहार कर रहा है और कांग्रेस द्वारा किए गए वक्फ एक्ट के संशोधन के कारण संपत्तियों पर कब्जा कर रहा है.

वक्फ बोर्ड कानून का इतिहास
1954 का वक्फ बोर्ड एक्ट: भारत सरकार ने पाकिस्तान गए मुसलमानों की संपत्तियों को वक्फ बोर्डों को सौंपने के लिए 1954 का वक्फ बोर्ड एक्ट लागू किया. इसका उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए संपत्तियों का प्रबंधन करना था.
1995 का संशोधन: 1991 में बाबरी मस्जिद के ध्वंस के बाद पीवी नरसिंहा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड एक्ट में संशोधन किया. इस संशोधन ने वक्फ बोर्डों को असीमित अधिकार दिए, जिससे वे अधिक जमीनें अधिग्रहित कर सके. सूत्रों ने कहा, ”2013 में, इस अधिनियम में और संशोधन करके वक्फ बोर्ड को किसी की संपत्ति छीनने की असीमित शक्तियां दे दी गई, जिसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी.”
वर्तमान स्थिति: वक्फ अब भारत में रक्षा और रेलवे के बाद तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक है.
2014 का संपत्ति हस्तांतरण: कांग्रेस सरकार ने मार्च 2014 में लोकसभा चुनावों से ठीक पहले, दिल्ली वक्फ बोर्ड को दिल्ली में 123 प्रमुख संपत्तियां सौंपीं. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत के संसाधनों का पहला हक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों का है. उन्होंने 2014 में नेशनल वक्फ डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के लॉन्च के दौरान कहा कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए किया जाएगा.
सरकारी फंड का वितरण
2022 का आरटीआई खुलासा: 2022 में एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आप सरकार ने 2015 से दिल्ली वक्फ बोर्ड को 101 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक फंड दिया. 2021 में अकेले 62.57 करोड़ रुपये वितरित किए गए. अरविंद केजरीवाल का बयान: 2019 में अरविंद केजरीवाल ने मुंबई में सबसे अमीर व्यक्ति के घर का वक्फ संपत्ति पर निर्माण होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार होती, तो वह उस निर्माण को ढहा देते.
रेलवे और सशस्त्र बलों के बाद सबसे अधिक जमीन
वक्फ बोर्ड सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद भारत में तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामी है. यूपी में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्ति है. यूपी में सुन्नी बोर्ड के पास कुल 2 लाख 10 हजार 239 संपत्तियां हैं, जबकि शिया बोर्ड के पास 15 हजार 386 संपत्तियां हैं. हर साल हजारों व्यक्तियों द्वारा बोर्ड को वक्फ के रूप में संपत्ति की जाती है, जिससे इसकी दौलत में इजाफा होता रहता है.
केजरीवाल सरकार भी रही मेहरबान
2022 में, एक आरटीआई जवाब से पता चला कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार ने 2015 में सत्ता में आने के बाद से दिल्ली वक्फ बोर्ड को 101 करोड़ रुपये से अधिक सार्वजनिक धन दिया है और 2021 में अकेले 62.57 करोड़ रुपये दिए गए. 2019 में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि “ऐसा कहा जाता है कि इस देश के सबसे अमीर व्यक्ति का आवास, जो मुंबई के अंदर है, एक वक्फ संपत्ति पर बनाया गया है. मैं गलत नहीं कह रहा हूं, है ना? मुंबई की सरकार इस बारे में कुछ नहीं कर सकती.अगर हमारी सरकार होती, तो हम निर्माण को ध्वस्त कर देते”
वक्फ अधिनियम के दुरुपयोग के उदाहरण
-आज देश में 30 वक्फ बोर्ड हैं, जिन्होंने अब तक संपत्तियों और मंदिर की जमीनों का उल्लंघन किया है. तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने हाल ही में एक पूरे गांव पर स्वामित्व का दावा किया है, जिससे गांव वाले हैरान हैं. गांव में 1500 साल पुराना हिंदू मंदिर भी था. यह वाकई हास्यास्पद है कि 1400 साल पुराना धार्मिक बोर्ड 1500 साल पुराने मंदिर पर दावा कर रहा है.
-हरियाणा के यमुनानगर जिले के जठलाना गांव में वक्फ की ताकत तब देखने को मिलीं, जब गुरुद्वारा (सिख मंदिर) वाली जमीन को वक्फ को हस्तांतरित कर दिया गया. इस जमीन पर किसी मुस्लिम बस्ती या मस्जिद के होने का कोई इतिहास नहीं है.
-नवंबर 2021 में मुगलीसरा में सूरत नगर निगम मुख्यालय को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था. तर्क यह दिया गया था कि शाहजहां के शासनकाल के दौरान, संपत्ति को सम्राट ने अपनी बेटी को वक्फ संपत्ति के रूप में दान कर दिया था, और इसलिए, आज लगभग 400 साल बाद भी इस दावे को उचित ठहराया जा सकता है.
-2018 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि ताजमहल का स्वामित्व सर्वशक्तिमान (Almighty) के पास है, और व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाहजहां से हस्ताक्षरित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए कहे जाने पर, इस निकाय ने दावा किया कि स्मारक सर्वशक्तिमान का है, और उनके पास कोई हस्ताक्षरित दस्तावेज़ नहीं है, लेकिन उन्हें संपत्ति का अधिकार दिया जाना चाहिए.
13 साल के में दोगुनी हो गई वक्फ की संपत्ति
सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में वक्फ की पूरे भारत में करीब 52,000 संपत्तियां थीं। 2009 तक यह संख्या 4,00,000 एकड़ भूमि को कवर करते हुए 3,00,000 पंजीकृत संपत्तियों तक पहुंच गई थी। सूत्रों ने कहा कि ”आज, पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की संख्या 8,72,292 से अधिक हो गई है, जो 8,00,000 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली हुई है। यह केवल 13 वर्षों के भीतर वक्फ भूमि के नाटकीय रूप से दोगुना होने को दर्शाता है।”



