132 patients were successfully treated on the fifth day of the free physiotherapy camp
रायगढ़। हीलिंग हैंड्स फिजियोथेरेपी क्लिनिक द्वारा आयोजित दस दिवसीय निःशुल्क फिजियोथेरेपी शिविर के पांचवे दिन का सफल आयोजन हुआ, जिसमें 132 मरीजों का उपचार किया गया। 1 सितंबर से शुरू हुआ यह शिविर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भवन, टीवी रोड, रायगढ़ में आयोजित किया जा रहा है, और इसमें मरीजों को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक नि:शुल्क सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। अब तक शिविर में 618 मरीजों ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान प्राप्त किया है। शिविर का समापन 10 सितंबर को होगा।

शिविर में उपचारित रोग और समस्याएं
शिविर के दौरान, ऑस्टियोआर्थराइटिस, घुटनों का दर्द, खेल से जुड़ी चोटें, पीठ और गर्दन के दर्द, टेक्स्ट नेक सिंड्रोम, स्लिप डिस्क, साइटिका, और झुनझुनी जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों का उपचार किया गया। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. निर्मल मल्लिक के अनुसार,ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों में घुटने का दर्द सबसे आम लक्षण है, जिससे उन्हें जॉगिंग, दौड़ने, या सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई होती है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस तब होता है जब घुटने के जोड़ की उपास्थि टूट जाती है, जिससे हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं। घुटने में अकड़न, सूजन और दर्द इस स्थिति के सामान्य लक्षण होते हैं।
ऑस्टियोआर्थराइटिस का उपचार और लक्षण
फिजियोथेरेपी के माध्यम से घुटने के जोड़ के दर्द, सूजन और अकड़न को कम किया जा सकता है। इसके लिए क्रायोथेरेपी, मैनुअल थेरेपी, इलेक्ट्रो थेरेपी और व्यायाम चिकित्सा जैसे उपचार शामिल हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए फिजियोथेरेपी के नियमित अभ्यास से चलने, घुटने टेकने और बैठने जैसी दैनिक क्रियाओं में आराम मिलता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों में घुटने में दर्द, अकड़न, सूजन, चटकने की आवाज़ और जोड़ का डगमगाना शामिल हैं। यह समस्या ज्यादातर लोगों में 40 की उम्र के बाद विकसित होती है, और महिलाएं इसकी अधिक शिकार होती हैं।
विटामिन डी की भूमिका
डॉ. मल्लिक ने बताया कि ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों में विटामिन डी की कमी आम होती है, जिससे हड्डियों में कमजोरी और जोड़ों में घर्षण बढ़ता है। विटामिन डी की पूरकता से ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को राहत मिलती है, क्योंकि यह हड्डियों की मजबूती को बनाए रखने में मदद करता है और जोड़ों के दर्द को कम करता है।
जांच और उपचार के उपाय
ऑस्टियोआर्थराइटिस का निदान एक्स-रे और एमआरआई जैसे परीक्षणों द्वारा किया जाता है, जो हड्डियों की क्षति और जोड़ों की स्थिति को दिखाते हैं। इसके उपचार में दर्द कम करना, संयुक्त कार्य में सुधार लाना, और रोग के बढ़ने से रोकने जैसे उद्देश्य होते हैं।
डॉ. मल्लिक के अनुसार, वजन को नियंत्रित करना, जोड़ों को लचीला बनाए रखने के लिए व्यायाम करना, और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए ऑर्थोटिक्स का उपयोग करने से ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को कम किया जा सकता है।
शिविर का समापन 10 सितंबर को होगा, और फिजियोथेरेपी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों को अधिक से अधिक संख्या में आने का अनुरोध किया गया है।





