The basic mantra to attain God is complete surrender.. Pt Bajrang Choubey
जांजगीर साकेत तिवारी । संगीतमय श्रीमदभागवत कथा राठौर परिवार सिवनी नैला में कराया जा रहा है। जिसके कथा वाचक तागा वाले बजरंग चौबे ने पांचवे दिन कृष्ण जन्म की कथा कथा सुनाते हुए कहा – आत्म- विश्वास, जितेंद्रियता और इष्ट के प्रति अनन्य समर्पण; आनन्द-साम्राज्य द्वार की सहज कुंजियाँ हैं ..! संपूर्ण समर्पण ही है – प्रभु प्राप्ति का मूल मंत्र। समर्पण से मिलती है – पूर्णता। समर्पण ठीक वैसे ही है जैसे एक कन्या विवाह के बाद अपने पति के प्रति समर्पित हो जाती है। माता-पिता का मोह छोड़कर वह अपना सब कुछ पति को ही मानती है। पति पर उसका पूर्ण विश्वास होता है। मन-वचन कर्म से इष्ट के प्रति समर्पण अभयता और आनंद प्रदाता है। अर्पण, तर्पण व समर्पण हमारी परंपरा की पहचान है। पश्चिमी देशों के लोग इसे नहीं समझ सकते। संशय मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है। कथा से विचारों का संशय दूर होता है; बशर्ते सत्संग में बैठने वाला व्यक्ति उसकी गंभीरता को समझे। मनुष्य के पास अनंत साधन हैं। उतना ही असंतोष भी है। मन में रुचियों के प्रवेश से घर अखाड़ा बन जाता है। पहचान और वर्चस्व आज लोगों के लिए संकट बन गया है। धर्म की व्यवहारिकता का परिचय अहं भाव के शून्य-समर्पण में ही है। यह समर्पण समाज के प्रति प्रारंभ होता है और उसका पर्यवसान परम तत्व पर होता है। कथा श्रवण करने मुख्य यजमान सीता देवी देवी प्रसाद राठौर पुष्पलता देवेश राठौर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




