Greenfield Steel Plant: Oppression of environment and public in the race for development?
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट को लेकर विवाद तेज हो गया है। तुमीडीह और पूंजीपथरा गांव में मेसर्स प्रिस्मो स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्लांट की स्थापना की योजना पर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इस परियोजना पर 23 दिसंबर 2024 को लोक सुनवाई की घोषणा की है, लेकिन इससे पहले ही विरोध की आवाजें बुलंद हो गई हैं।

स्थानीय निवासियों की मुख्य चिंताएं
प्रदूषण का खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि यह परियोजना क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण को और बढ़ावा देगी। पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के कारण दूषित हवा और पानी की समस्या विकराल है। प्लांट से निकलने वाले धुएं और औद्योगिक कचरे के कारण स्थानीय जल स्रोत प्रभावित होंगे, जिससे स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है।
स्वास्थ्य पर असर
हवा और पानी में प्रदूषक तत्वों की वृद्धि से आसपास के निवासियों में श्वसन रोग और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ेगा। कई ग्रामीण पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे हैं, ऐसे में स्थिति और बिगड़ सकती है।
वन्यजीवन पर संकट
प्रस्तावित स्थल के आसपास के जंगल वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक आवास हैं। प्लांट के कारण होने वाले शोर और प्रदूषण से जानवरों के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता को गंभीर खतरा हो सकता है।
ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट के तहत विभिन्न औद्योगिक इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है:
डीआरआई किल्न्स: 3,63,000 टीपीए क्षमता
इंडक्शन फर्नेस: 2,64,000 टीपीए
रोलिंग मिल्स और कोल वाशरी यूनिट
50 मेगावाट का पावर प्लांट
ईंट निर्माण इकाई
विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण
यह परियोजना स्थानीय जनता के लिए कठिन स्थिति निर्मित हो रही है। जहां कुछ लोग इसे औद्योगिक विकास के लिए जरूरी मानता है, वहीं स्थानीय लोग इसे पर्यावरण और उनकी जिंदगी के लिए खतरा बता रहे हैं।
23 दिसंबर 2024 को लोक सुनवाई के दौरान ग्रामीणों और पर्यावरणविदों के तर्क और विरोध की गंभीरता प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास के इस मॉडल में पर्यावरण और जनता की भलाई को कितनी प्राथमिकता दी जाती है।



