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सपनों को साकार कर आत्मनिर्भर बनी कविता खान,सफल उद्यमी के रूप में कविता को मिली नई पहचान

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Kavita Khan became self-reliant by realizing her dreams, Kavita got a new identity as a successful entrepreneur

रायपुर / कविता खान का मानना है कि दृढ़ निश्चय से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि महिलाएं अगर अपने सपनों को साकार करने की ठाने तो आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर सकती हैं। कविता के इस सफलता के पीछे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसने उनके जैसे कई अन्य लोगों को अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया है।

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केंद्र एवं राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण और उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं। शासन की योजनाओं से आज महिला सशक्तिकरण की परिकल्पना साकार हो रही है। महिलाएं विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल अपने पैरों में खड़े हो रही हैं बल्कि अपने परिवार के पालन पोषण में भी मदद कर रही हैं। कोंडागांव की कविता खान ऐसी ही महिला है जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से शासन की योजना का लाभ उठाकर आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उनकी यह कामयाबी न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि जिले की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

कठिन परिस्थितियों से शुरू हुआ सफर

कविता स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहती थी, लेकिन उनके लिए यह राह आसान नहीं था। घर से बाहर निकलकर खुद का व्यवसाय शुरू करना एक बड़ी चुनौती थी। प्रारंभ में उन्होंने घर से ही अपना बेकरी का कार्य करती थी। उनका सपना एक बेकरी की दुकान खोलना था पर आर्थिक समस्या ने उनकी राह और भी मुश्किल बना दी थी।

रोजगार सृजन योजना ने दी उम्मीदों को नई दिशा

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता कविता के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई। अपनी मां की प्रेरणा से उन्होंने अपनी जमा पूंजी और ऋण की राशि को मिलाकर कोण्डागांव में ड्रीम कैक्स एण्ड बैक्स के नाम से बेकरी की दुकान शुरू की। शुरुआत में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन पति और परिवार के सहयोग ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद की।

कविता ने बताया कि शुरुआत में घर और व्यवसाय दोनों को संभालना मुश्किल था। लेकिन अगर आत्मनिर्भर बनना है, तो मुश्किलों का सामना करना ही पड़ता है। इसके बाद उन्होंने बैंक से साढ़े पांच लाख रुपये का लोन लिया, जिसमें तीन लाख रुपये टर्म लोन और ढाई लाख रुपये सीसी लोन शामिल था। इस राशि से और अपनी जमा पूंजी से उन्होंने आवश्यक मशीनरी और सामग्री खरीदी।

आज उनकी बेकरी की दुकान अच्छी तरह से चल रही है। हर महीने उन्हें लगभग 30 से 40 हजार रुपए की आमदनी होती है। उन्होंने बताया कि दो कर्मचारियों की सहायता से वे व्यवसाय का संचालन कर रही हैं। उनके पति और बच्चों का सहयोग उनकी सफलता का मजबूत आधार बना। कविता ने शासन की योजना की सहायता से उनके सपनों को साकार किया इसके लिए केन्द्र एवं राज्य शासन को धन्यवाद दिया।

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