पुसौर
विधान सभा चुनाव के लगभग ठीक एक साल बाद नगरी निकाय का कार्यकाल पुरा होता है और ऐसे ही दिसम्बर जनवरी माह में उसका चुनाव होता है जिसमें उम्मीदवार जनता के बीच जाकर अपने वादों के जरिये वोट की मांग करता है। नगर पंचायत पुसौर के 15 वार्डो में बिते 2019 के चुनाव में 38 प्रत्याषियों ने अपने वादे और कार्य क्षमता का परिचय देते हुये जनता के बीच गये जिसमें 15 प्रत्याषियों को निकाय की जनता ने मुहर लगाई। तात्कालीन समय में 2 निर्दलिय 6 भाजपा तथा 7 कांग्रेसी पार्शद रहे। निर्दलिय पार्शद को छोडकर नगर की जनता बीजेपी की तुलना में कांग्रेस पर ज्यादा भरोसा जताया और अध्यक्ष चुनाव में भी कांग्रेस ने बाजी मार ली जियये नगर सरकार कांग्रेस का बना । उक्त सरकार के अब तक के 4 सालों में वार्ड पार्शद अपने किये हुये वादों को कितने पुरे किये, उनके अन्य अपेक्षाओं में कितने खरे उतरे उसका आत्म मंथन का समय आ चुका है वहीं वे चाहें तो बचे हुये एक साल में सुधार भी सकते हैं यदि वे दुसरी पारी की राजनीति में षामिल होना चाहें तो। जनता की मुलभुत आवष्यकता पानी, स्वच्छता, बिजली, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, सामाजिक सुरक्षा पेंषन, परिवार सहायता, प्रधानमंत्री आवास, राषन वितरण संबंधी सुविधा, श्रद्धांजलि योजना आदि के तहत संबंधित मतदाता परिवार को लाभ पहुचाना वार्ड पार्शद का नैतिक दायित्व है साथ ही वार्ड के आवष्यकतानुसार सांस्कृतिक मंच अथवा मंगलभवन जैसे निर्माण कार्य को मुर्तरूप देना भी होता है। बिते 4 साल के कार्यकाल में उपरोक्त योजनाओं के तहत कितने परिवार को लाभ पहुंचाया है जनप्रतिनिधि स्वयं जांच सकते हैं। षासन की योजनाओं से हटकर अपने बलबुते भी कितने को लाभ पहुंचाया है इस तथ्य को मतदाता को अवगत करा सकते हैं। इससे इतर नगर सरकार षासकीय कल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच पहुंचाने में कितने सफल हुई, किये गये निर्माण कार्य कितने भरोसेमंद रहे। इन सभी बिन्दुओं पर जनता आने वाले नगरी निकाय के चुनाव में जबाब देगी। उल्लेखनीय है कि नगर सरकार का बागडोर अध्यक्ष रितेष थवाईत के हाथ में है इन्हौने जनहित में कार्य कराने राज्य सरकार का कितना अधिक से अधिक मदद ले पाया है यह धरातल में दिख रहा है।




