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छत्तीसगढ़ में अब 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी; शहरों में नियम लागू नहीं

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रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 पारित हो गया है। इस नए विधेयक के तहत, अब 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। यह निर्णय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के उस प्रावधान को पलटता है, जिसमें ऐसी रजिस्ट्री की अनुमति थी। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि पूर्व में 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री होने से प्रदेश भर में अवैध प्लॉटिंग बढ़ गई थी और इससे कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।

 

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शहरों पर लागू नहीं होगा नया नियम

राजस्व मंत्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह नया नियम शहरों में लागू नहीं होगा, क्योंकि शहरों में भूमि आमतौर पर कृषि श्रेणी से बाहर होती है। शहरी क्षेत्रों में डायवर्टेड भूमि जो व्यवसायिक और आवासीय उपयोग के लिए होती है, उसकी रजिस्ट्री पहले की तरह होती रहेगी।

 

जियो-रेफरेंसिंग आधारित डिजिटल मैप को कानूनी मान्यता

विधेयक में जियो-रेफरेंसिंग आधारित डिजिटल मैप को कानूनी मान्यता देने का भी प्रावधान है। राजस्व मंत्री ने बताया कि पूरे प्रदेश में जियो-रेफरेंसिंग का काम चल रहा है, लेकिन अब तक इसे विधिक मान्यता नहीं मिली थी। इस विधेयक के पारित होने से डिजिटल मैप को कानूनी दर्जा मिलेगा, जिससे सीमांकन और बटांकन (नक्शे के बंटवारे) से जुड़े विवाद समाप्त हो जाएंगे और भविष्य में कोई गड़बड़ी नहीं होगी।

 

स्वतः नामांतरण और बिल्डरों पर नकेल

इस संशोधन में रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई है। इसके अलावा, दान की भूमि के लिए भी नए प्रावधान बताए गए हैं।

एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब कॉलोनी डेवलपर या बिल्डर रोड, गार्डन, मंदिर जैसी सार्वजनिक उपयोग के लिए छोड़ी गई जमीन को बेच नहीं पाएंगे। राजस्व मंत्री ने बताया कि अब तक बिल्डर फ्लैट बेचते थे और जमीन अपने नाम रखते थे, लेकिन अब फ्लैट मालिकों के साथ 10 हजार वर्गफुट जमीन भी समानुपातिक रूप से उन क्रेताओं के नाम पर रहेगी, जिसमें गार्डन, मनोरंजन स्थल, या भवन का क्षेत्र शामिल होगा। इससे पहले बिल्डर इन जगहों पर कॉम्पलेक्स बना देते थे या रोड को बेच देते थे, जिससे कई समस्याएं होती थीं। यह संशोधन इन समस्याओं को दूर करेगा।


 

पट्टा अधिकार में वार्षिक आय की सीमा बढ़ी

इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार (संशोधन) विधेयक 2025 भी पारित किया गया है। इस विधेयक के तहत, बीएलसी के अंतर्गत नगरीय निकाय क्षेत्र में निवासरत पात्र हितग्राहियों के लिए EWS श्रेणी की अधिकतम वार्षिक आय ₹3 लाख निर्धारित की गई है। इससे पहले यह सीमा ₹2.5 लाख थी। इस संशोधन से अधिक लोग पट्टा अधिकार का लाभ उठा सकेंगे।

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