मुंबई: 24 जुलाई को मस्कट से मुंबई आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक फ्लाइट में थाईलैंड की एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया। विमान में सवार एक नर्स और केबिन क्रू की मदद से यह डिलीवरी सकुशल संपन्न हुई। इस घटना ने एक अहम सवाल को फिर से जन्म दिया है: धरती से हजारों फीट ऊपर जन्मे बच्चे की नागरिकता कैसे तय होती है?

8 मई 2025 को भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब रयानएयर की ब्रुसेल्स से कास्टेलॉन जा रही फ्लाइट में लगभग 18,000 फीट की ऊंचाई पर एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया।
हवा में जन्मे बच्चों की नागरिकता: कोई सार्वभौमिक नियम नहीं
फ्लाइट में पैदा होने वाले बच्चों की नागरिकता से जुड़ा कोई एक सार्वभौमिक नियम नहीं है। हालांकि, अधिकांश देश माता-पिता की राष्ट्रीयता और विमान के रजिस्ट्रेशन के आधार पर नागरिकता का फैसला करते हैं। वहीं, कुछ देश बच्चे के जन्म स्थान को भी महत्व देते हैं (जूस सोली – jus soli)। मेडिकल सहायता कंपनी मेडएयर के अल्वेस के मुताबिक, एक विमान को उस देश की जमीन माना जाता है, जहां वह पंजीकृत है।
कैसे तय होती है बच्चे की नागरिकता?
फ्लाइट में जन्मे बच्चे की नागरिकता तय करने के लिए कई नियम माने जाते हैं, जिससे कुछ मामलों में निर्धारण कठिन हो सकता है। मुख्य रूप से ये कारक महत्वपूर्ण होते हैं:
- माता-पिता की नागरिकता: दुनियाभर के ज़्यादातर देश माता-पिता की राष्ट्रीयता के आधार पर बच्चे की नागरिकता तय करते हैं। इन देशों में जन्मसिद्ध नागरिकता (जहां जन्म हुआ वहीं की नागरिकता) का प्रावधान नहीं है। भारत भी इन्हीं देशों में शामिल है। यदि बच्चे के माता-पिता में से कोई भारतीय नागरिक है, तो उस बच्चे को भारत की नागरिकता मिल जाएगी, भले ही उसका जन्म किसी भी देश की हवाई सीमा में हुआ हो।
- फ्लाइट का रजिस्ट्रेशन: 1944 के अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन सम्मेलन के अनुच्छेद 17-21 के अनुसार, जिस देश में विमान पंजीकृत होता है, उस देश की राष्ट्रीयता उसके पास होती है। कोई भी विमान एक से अधिक देशों में पंजीकृत नहीं हो सकता। 1961 के ‘राज्यविहीनता में कमी से जुड़े कन्वेंशन’ के मुताबिक, अगर किसी बच्चे का जन्म अंतर्राष्ट्रीय जल या हवाई क्षेत्र में होता है, जहां किसी देश का दावा नहीं है, तो बच्चे को नागरिकता उस देश की मिलेगी, जहां फ्लाइट पंजीकृत है। ब्रिटेन ऐसे बच्चों को अपने यहां नागरिकता देता है, जिनका जन्म उसके यहां पंजीकृत विमानों में हुआ हो।
यह जटिल मुद्दा है क्योंकि विभिन्न देशों के अपने नागरिकता कानून होते हैं, जो इन स्थितियों में अलग-अलग तरह से लागू होते हैं।



