नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी काम पर आते या जाते समय किसी दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गंवा देता है, तो उसका परिवार एम्प्लॉई कंपनसेशन (EC) एक्ट 1923 के तहत मुआवजे का हकदार होगा।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला एक वॉचमैन की मौत से जुड़े मामले में सुनाया, जो काम पर आते समय दुर्घटना का शिकार हो गया था। यह हादसा उसके दफ्तर से मात्र 5 किलोमीटर पहले हुआ था।

हाई कोर्ट ने पलटा था निचली अदालत का फैसला
इस मामले में, वर्कमैन कंपनसेशन अथॉरिटी ने वॉचमैन के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया था और मुआवजे का आदेश दिया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस फैसले को यह कहते हुए पलट दिया था कि दुर्घटना को ‘काम के दौरान’ नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 22 अप्रैल 2003 का है, जब एक शुगर फैक्ट्री में वॉचमैन के तौर पर कार्यरत शाहू संपतराव जधावर की मौत हो गई थी। वे फैक्ट्री में रात 3 बजे से सुबह 11 बजे तक काम करते थे। अप्रैल 2003 में जब संपतराव फैक्ट्री जा रहे थे, तब फैक्ट्री से 5 किलोमीटर पहले उनका एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनकी जान चली गई।
वर्कमैन कंपनसेशन कमिश्नर ने संपतराव के परिवार को ₹3,26,140 का मुआवजा देने का आदेश दिया था, साथ ही यह भी कहा था कि फैक्ट्री इस मुआवजे पर सालाना 12% ब्याज भी दे। इंश्योरेंस कंपनी ने 2011 में इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि यह दुर्घटना कार्यस्थल पर नहीं हुई थी, इसलिए इसे ‘काम के दौरान हुई दुर्घटना’ नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने 29 जुलाई को संपतराव के परिवार के हक में फैसला सुनाया।कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कर्मचारी का घर से कार्यस्थल और कार्यस्थल से घर जाते समय होने वाला हादसा भी EC एक्ट की धारा 3 के तहत ‘काम के दौरान और काम से जुड़ा’ माना जाएगा।
अदालत ने स्पष्ट किया, “EC एक्ट की धारा 3 में ‘accident arising out of and in the course of his employment’ का मतलब इस प्रकार है कि कर्मचारी का नौकरी के लिए घर से वर्कप्लेस तक जाते और ड्यूटी के बाद वर्कप्लेस से घर तक आते वक्त होने वाली दुर्घटना भी शामिल है, बशर्ते कि दुर्घटना का संबंध काम से हो।” सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारी की मौत रास्ते में हुई थी, इसलिए मुआवजा नहीं दिया जा सकता। यह फैसला लाखों कर्मचारियों के परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।



