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पालक-शिक्षक बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर, अभिभावकों को बताए गए शिक्षण मानदंड

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Emphasis on all-round development of children in parent-teacher meeting, teaching norms told to parents

रिपोर्टर रोहन यादव लैलूंगा
सुगापारा कर्राबेंवरा संकुल फरसाटोली (वि.खं. पत्थलगांव) में गरिमामय आयोजन संपन्न

Ro.No - 13672/140

पत्थलगांव:/शासकीय प्राथमिक शाला सुगापारा कर्राबेंवरा संकुल फरसाटोली के तत्वावधान में आज दिनांक 7 अगस्त 2025 को एक प्रेरणादायी पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन अत्यंत उत्साह और सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के शैक्षणिक, मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास हेतु निर्धारित सर्वांगीण शिक्षण मानदंडों पर गंभीर और सारगर्भित चर्चा की गई।

बैठक का शुभारंभ विद्यालय के प्रधान पाठक के स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने शिक्षा के वर्तमान परिवेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों एवं शिक्षक-पालक सहभागिता की महत्ता पर प्रकाश डाला। पालकों को यह स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि बच्चों की शैक्षणिक उन्नति केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, अपितु घर-परिवार का समुचित वातावरण भी उनके सर्वांगीण विकास में समान रूप से आवश्यक है।

मुख्य बिंदु रहे –

बच्चों की बौद्धिक क्षमताओं के विकास हेतु नियमित गृह कार्य, पुस्तक पठन और गणितीय अभ्यास की निरंतरता।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त निद्रा, और खेलकूद की उपयोगिता पर जोर।

अनुशासन, स्वच्छता और नैतिक मूल्यों की शिक्षा को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने पर विशेष बल।

मोबाईल और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बच्चों को बचाने हेतु अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह।

बैठक में शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से पालकों से संवाद स्थापित करते हुए प्रत्येक छात्र की प्रगति, कमजोर विषय, और सुधार की संभावनाओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया। पालकों ने भी खुलकर अपने विचार साझा किए और विद्यालय की गतिविधियों की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी पालकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए यह आशा व्यक्त की गई कि वे विद्यालय के साथ समन्वय बनाकर अपने बच्चों को एक उज्ज्वल, जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बनाने की दिशा में योगदान देंगे।

यह पालक-शिक्षक बैठक न केवल एक संवाद का मंच बनी, बल्कि यह भी सिद्ध हुआ कि जब विद्यालय और परिवार साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी बच्चों के सर्वांगीण विकास का स्वप्न साकार हो पाता है।

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