करवा चौथ का व्रत आज 10 अक्टूबर शुक्रवार को सिद्ध योग में मनाया जा रहा है. आज सुहागन महिलाओं ने सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करके निर्जला व्रत का प्रारंभ किया. यह व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक यानी चंद्रमा को अर्घ्य देने तक बिना अन्न और जल के रखना होता है. करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और सुख समृद्धि के लिए रखते हैं. आज करवा चौथ शुक्रवार के दिन है ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भौतिक सुख सुविधा, प्रेम, सुखी वैवाहिक जीवन आदि का कारक माना जाता है. सिद्ध योग में शुरू हुआ करवा चौथ व्रती महिलाओं के मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक है.
करवा चौथ व्रत में सूर्यास्त के बाद जब प्रदोष काल प्रारंभ होगा उस समय करवा चौथ की पूजा होगी. शुभ मुहूर्त में श्री गणेश माता गौरी भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा विधिपूर्वक की जाती है. महिलाएं समूह में बैठकर करवा चौथ व्रत कथा सुनती हैं, उसके बाद आरती होती है. उसके बाद चांद की निकालने का इंतजार होता है रात के समय में चंद्रोदय होने पर महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं, उसके बाद अर्घ्य देती हैं और पति के हाथों जल पीकर पारण करती हैं. यह करवा चौथ का व्रत आपके लिए शुभ दायक और मनोकामना पूर्ति वाला हो. आइए जानते हैं करवा चौथ मुहूर्त, मंत्र, करवा चौथ व्रत कथा, पूजा टाइम, चांद निकलने का समय.

करवा चौथ शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार चतुर्थी तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 10 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 38 मिनट पर होगा.
वहीं, करवाचौथ के लिए एक पूजन मुहूर्त मिलेगा, जो शाम 5 बजकर 57 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. जिसकी अवधि 1 घंटे 14 मिनट की रहेगी.
इसके अलावा, करवा चौथ के दिन उपवास रखने का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में व्रती महिलाएं माता करवा की पूजा, माता पार्वती की पूजा, भगवान गणेश की पूजा, कथा सुनना जैसे सभी कार्य किए जा सकते हैं.
करवा चौथ की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, करवा नामक महिला थी, जो अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के किनारे रहती थी. एक दिन, उसके पति नदी में स्नान कर रहे थे, तभी एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और उन्हें नदी में खींचने लगा. करवा ने अपने पति की पुकार सुनकर तुरंत एक कच्चा धागा लेकर मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया. करवा के सतीत्व के कारण मगरमच्छ कच्चे धागे से बंध गया और हिल तक नहीं पा रहा था.
करवा ने यमराज को पुकारा और अपने पति को जीवनदान देने और मगरमच्छ को मृत्युदंड देने के लिए प्रार्थना की. यमराज ने करवा की बात मानी और मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया. साथ ही, यमराज ने करवा के पति को जीवनदान दे दिया.
इसी तरह, सावित्री ने भी अपने पति के प्राणों की रक्षा के लिए यमराज से प्रार्थना की थी. सावित्री ने अपने पति को वट वृक्ष के नीचे लपेटकर रखा था और यमराज को अपने पति के प्राण लौटाने पड़े थे. सावित्री को ताउम्र सुहागन का वरदान मिला था. तभी से, करवा चौथ के दिन, सुहागन महिलाएं करवा माता से प्रार्थना करती हैं कि जैसे आपने अपने पति को मृत्यु के मुंह से बचाया था, वैसे ही हमारे सुहाग की भी रक्षा करें.
यह सामग्री सामान्य सूचना और सांस्कृतिक संदर्भ हेतु है; मुहूर्त/चंद्रोदय समय स्थानानुसार बदल सकते हैं, कृपया स्थानीय पंचांग/घोषणाओं से सत्यापित करें ।



