भारत में 6G क्रांति: 2028 में ट्रायल, AI देगा रॉकेट जैसी रफ्तार और क्रिस्टल क्लियर वॉयस
नई दिल्ली: देश अब संचार प्रौद्योगिकी के अगले पायदान की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। 5G के व्यापक रोलआउट के बाद, भारत सरकार ने अब 6G नेटवर्क को ज़मीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसका ट्रायल 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। दूरसंचार सचिव नीरज मित्तल ने हाल ही में इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि छठी पीढ़ी के इस नेटवर्क की गति और विश्वसनीयता बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका निर्णायक होगी।

AI बनेगा 6G की ‘स्मार्ट पावर’
दूरसंचार सचिव के अनुसार, AI तकनीक 6G नेटवर्क को केवल तेज़ नहीं, बल्कि अत्यंत कुशल और ‘सेल्फ-हीलिंग’ बनाएगी।AI नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को अनुकूलित (ऑप्टिमाइज़) करेगा, जिससे इंटरनेट की गति कई गुना बढ़ जाएगी—यह एक रॉकेट जैसी स्पीड देने का वादा है।एजेंटिक AI (Agentic AI) जैसे उन्नत AI रूपों का उपयोग होगा, जो नेटवर्क की कमियों को खुद पहचानकर तुरंत ठीक कर देंगे। इससे कॉल ड्रॉप और नेटवर्क डाउन जैसी समस्याओं से बड़ी राहत मिलेगी और कॉल की गुणवत्ता क्रिस्टल क्लियर होगी।यह नई तकनीक नेटवर्क को खुद से समस्याओं का समाधान करने की क्षमता देगी, जिससे ग्राहक सेवा (सर्विस) की विश्वसनीयता में कई गुना सुधार आएगा।
AI के दुरुपयोग से बढ़ती चुनौती
जहां AI 6G के लिए वरदान साबित होगा, वहीं मित्तल ने इसके दुष्प्रभावों और दुरुपयोग के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने ऑनलाइन ठगी, आवाज की नकल (वॉयस क्लोनिंग) और डीपफेक वीडियो जैसी बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। सरकार और तकनीक कंपनियों को मिलकर इस चुनौती से निपटने के लिए एक मज़बूत सुरक्षा घेरा तैयार करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा के लिए AI-आधारित सरकारी कवच
इस खतरे का मुकाबला करने के लिए, दूरसंचार विभाग ने एक AI-संचालित सिक्योरिटी टूल विकसित किया है। यह टूल धोखाधड़ी वाले लेनदेन की पहचान करने में अत्यंत सफल रहा है।
इस टूल की मदद से, PhonePe और Paytm जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों ने अब तक ₹200 करोड़ से अधिक की संभावित धोखाधड़ी को रोका है, साथ ही 48 लाख से ज़्यादा संदिग्ध ट्रांजैक्शन को भी ब्लॉक किया गया है।
भारत का लक्ष्य: ‘इंडिया AI मिशन’ के साथ वैश्विक नेतृत्व
नीरज मित्तल ने बताया कि भारत AI के सुनियोजित विकास के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
सरकार ने इसके लिए ‘इंडिया AI मिशन’ शुरू किया है, जिसके लिए 1.25 अरब डॉलर का बड़ा फंड आवंटित किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत में AI रिसर्च को बढ़ावा देना, नए स्टार्टअप्स को समर्थन देना और एक मजबूत व सुरक्षित AI इकोसिस्टम तैयार करना है।



