Industrialist Harbilas Agarwal and his sons have been booked for fraud worth ₹4.5 crore and alleged share grabbing.
श्री बांके बिहारी इस्पात प्रा. लि. में हुआ बड़ा आर्थिक घोटाला, रिश्तेदारी की आड़ में फर्जी “गिफ्ट डीड” बनाकर हड़प लिए गए लाखों शेयर

रायगढ़। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में रायगढ़ के प्रतिष्ठित उद्योगपति हरबिलास अग्रवाल और उनके पुत्र प्रणव अग्रवाल व आयुष अग्रवाल के खिलाफ करीब ₹4.5 करोड़ के फर्जीवाड़े का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि तीनों ने अपने ही रिश्तेदार के शेयर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से हड़प लिए।
यह मामला श्री बांके बिहारी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसके डायरेक्टर स्वयं आरोपी हैं। पुलिस ने तीनों के खिलाफ धारा 420 और 34 भा.दं.सं. (Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।रिश्तेदारी, विश्वास और व्यापार के इस संगम में एक बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला उजागर हुआ है।
अब यह देखना होगा कि पुलिस जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
रिश्तेदारी के भरोसे में हुआ करोड़ों का फर्जीवाड़ा
मिली जानकारी अनुसार शिकायत सूरजपुर जिले के केतका निवासी अजय अग्रवाल ने दर्ज कराई है, जो हरबिलास अग्रवाल के पारिवारिक रिश्तेदार हैं। अजय अग्रवाल ने वर्ष 2005 में कंपनी के 2,09,960 शेयर (प्रत्येक ₹10 मूल्य के) खरीदे थे, जिनकी वर्तमान कीमत लगभग ₹4.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।अजय अग्रवाल का आरोप है कि हरबिलास अग्रवाल ने षड्यंत्रपूर्वक “बैक डेट” की एक गिफ्ट डीड तैयार कराई, जिसमें यह दर्शाया गया कि अजय अग्रवाल ने अपने सभी शेयर “गिफ्ट” कर दिए हैं।
₹100 के स्टाम्प पर बनी फर्जी “गिफ्ट डीड”
फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा हिस्सा एक तथाकथित गिफ्ट डीड है, जिसे ₹100 के स्टाम्प पेपर पर 16 मई 2024 को निष्पादित दिखाया गया।
हालांकि, बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता उस दिन मौजूद नहीं थे, न ही उन्होंने किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। यह अधिकार रजिस्टार (Registrar) को होता है। इस तरह का दस्तावेज अवैध और नियम विरुद्ध है।
डायरेक्टर बेटों की भूमिका संदिग्ध, शेयर सर्टिफिकेट “नष्ट” बताकर बनाया नया सर्टिफिकेट
मिली जानकारी अनुसार जांच में सामने आया है कि हरबिलास अग्रवाल के पुत्र प्रणव और आयुष अग्रवाल, जो कंपनी के डायरेक्टर हैं, ने कंपनी रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
दोनों ने यह दिखाया कि अजय अग्रवाल के 28 शेयर सर्टिफिकेट नष्ट हो गए हैं, और फिर नया एकल शेयर सर्टिफिकेट (दिनांक 20 अप्रैल 2024) जारी कर 2,09,960 शेयर हरबिलास अग्रवाल के नाम ट्रांसफर कर दिए।
फॉरेंसिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित प्रमाणपत्र इस्तेमाल किए गए थे।
ऑपरेशन और मिसमैनेजमेंट केस में खुला राज
फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आरोपी पक्ष ने उक्त गिफ्ट डीड और शेयर ट्रांसफर डीड को अपने अधिवक्ता के माध्यम से “ऑपरेशन एंड मिसमैनेजमेंट” याचिका (क्रमांक 53.CB.2025) में पेश किया। कॉपी मिलने पर पीड़ित पक्ष को धोखाधड़ी का पता चला। पीड़ित अजय अग्रवाल का परिवार कंपनी में 47.25% हिस्सेदारी रखता है, जबकि हरबिलास अग्रवाल का 17.5% हिस्सा है। शेष हिस्सेदारी पारिवारिक और अन्य सदस्यों की है।
पुलिस जांच में सामने आई साजिश की परतें
पूंजीपथरा पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, “प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि कंपनी रिकॉर्ड, स्टाम्प और हस्ताक्षरों से छेड़छाड़ की गई है। वित्तीय अनियमितता के ठोस प्रमाण मिले हैं।” ऐसी चर्चा है।
मामले से जुड़े गवाहों और दस्तावेजों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि आरोप सिद्ध होने पर यह मामला कॉर्पोरेट फ्रॉड और आपराधिक विश्वासभंग का उदाहरण बनेगा।
कानूनी विशेषज्ञ बोले, इस तरह का दस्तावेज अवैध
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गिफ्ट डीड तैयार करने या पंजीकरण की अनुमति नहीं है, क्योंकि यह दानपत्र (Deed of Gift) होता है जिसे केवल रजिस्टार के समक्ष निष्पादित किया जा सकता है। ₹100 के स्टाम्प पर की गई ऐसी कार्रवाई प्रथम दृष्टया अवैध और नियमों के विपरीत है।
अब तक की स्थिति
मामला दर्ज: पूंजीपथरा थाना रायगढ़, आरोपी: हरबिलास अग्रवाल, प्रणव अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, कंपनी: श्री बांके बिहारी इस्पात प्रा. लि., नुकसान की राशि: लगभग ₹4.5 करोड़, धाराएँ: 420, 34 भा.दं.सं. (Bharatiya Nyaya Sanhita), दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच जारी।



