The attractive stall of “Forest Department” became the centre of attraction on the silver jubilee year of Chhattisgarh State Foundation Day.
‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना, ग्रीन गुफा और मियावाकी फॉरेस्ट जैसे नवाचारों की झलक

रायपुर / राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा लगाए गए स्टाल ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। स्टाल में विभाग की प्रमुख योजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।
स्टाल में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 में शुरू की गई ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना की झलक प्रमुख रूप से दिखाई दे रही है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 6.41 करोड़ पौधे छत्तीसगढ़ में रोपे जा चुके हैं। राज्य में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए शहरी सूक्ष्म वन (मियावाकी फॉरेस्ट) विकसित किए जा रहे हैं, जो हरित पर्यावरण को बढ़ावा दे रहे हैं।
स्टाल में हांदावाड़ा जलप्रपात (नारायणपुर), कुटुमसर गुफा (कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान) और बारनवापारा अभयारण्य जैसे प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थलों की जानकारी दी गई है। राज्य में वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों से काला हिरण की संख्या 77 से बढ़कर 190 हो गई है, वहीं बाघों की संख्या भी वर्ष 2021 में 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 में 35 तक पहुँच गई है।
वन विभाग की गज संकेत ऐप और गजरथ यात्रा जैसी पहल से मानव-हाथी संघर्ष कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। साथ ही, राज्य औषधीय पौधों के संरक्षण और छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड के माध्यम से वन संपदा के मूल्यवर्धन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
विभागीय स्टाल में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित ग्रीन गुफा परियोजना और घोटुल संस्था की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है, जो बस्तर क्षेत्र की आदिवासी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
राज्योत्सव में आने वाले आगंतुकों ने विभाग के इस स्टाल को अत्यंत रोचक और जानकारीपूर्ण बताया। पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और हरित विकास के संदेश से सुसज्जित यह स्टाल छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय उपलब्धियों और सतत विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की सजीव झलक प्रस्तुत कर रहा है।



