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राज्योत्सव में बॉलीवुड के पार्श्व गायक आदित्य नारायण सहित छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने बिखेरा रंग

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Artists from Chhattisgarh, including Bollywood playback singer Aditya Narayan, added colour to the Rajyotsav.

सुरमई शाम से सजी महफ़िल

Ro.No - 13672/140

छत्तीसगढ़ी संस्कृति और आधुनिक संगीत का मनोहारी संगम

रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य राज्योत्सव में आज बॉलीवुड के गीत-संगीत के साथ छत्तीसगढ़ की लोककला, संगीत और नृत्य की ऐसी रंगीन छटा बिखरी कि शाम सुरमई हो गई। सतरंगी छटा में गीतों की यूँ महफ़िल सजी की हर कोई गाते गुनगुनाते, थिरकते नजर आए। शाम ढलने के साथ गीत-संगीत के बढ़ते कारवाँ में सर्वप्रथम छत्तीसगढ़ी सुर-ताल से दर्शक-श्रोता झूम उठे। प्रख्यात छत्तीसगढ़ी गायक श्री सुनील तिवारी ने अपनी टीम के साथ लोकगीतों के स्वर से परंपरा और आधुनिकता के संगम से सजी इस सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों के दिलों में गहरा प्रभाव छोड़ा। वहीं गीत-संगीत की सजी महफ़िल में बॉलीवुड के महशूर पार्श्व गायक आदित्य नारायण ने गीतों से श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रख्यात लोकगायक सुनील तिवारी की प्रस्तुति से हुआ। राज्य अलंकरण चक्रधर कला सम्मान (2021) से सम्मानित तिवारी ने अपने लोकगायन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने जब “मोर भाखा के संग दया मया के सुघ्घर हवे मिलाप रे” और “अइसन छत्तीसगढ़िया भाखा कौनो संग” गुनगुनाया, तो पूरा दर्शकदीर्घा तालियों की गूंज से भर उठा। लोकगीतों की लड़ी में राऊत, राजगीत, ददरिया, सोहर, विवाह, पंथी और होली जैसे गीतों के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू बिखेर दी।

उनके गीत “पता ले जा रे गाड़ी वाला…”, “अरपा पैरी के धार…” और “मोर संग चलव रे…” ने दर्शकों को लोकसंगीत की उस दुनिया में पहुंचा दिया जहां परंपरा, भावना और माटी एकाकार हो जाते हैं। सामूहिक कर्मा नृत्य के माध्यम से गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले श्री तिवारी ने अपनी प्रस्तुति से लोकगायन की गरिमा को नए शिखर पर पहुंचाया।

चिन्हारी – द गर्ल बैंड ने बढ़ाई चमक

इसके बाद मंच पर आईं जयश्री नायर और मेघा ताम्रकार की ‘चिन्हारी – द गर्ल बैंड’ ने अपने ऊर्जावान प्रदर्शन से राज्योत्सव में नई ताजगी भर दी। उनकी गायकी में जहां लोकधुनों की आत्मा थी, वहीं संगीत संयोजन में आधुनिकता की झलक। बैंड की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि परंपरा और नवाचार का संगम ही आज की नई पहचान है। दर्शकों ने तालियों और उत्साह से उनका स्वागत किया।

सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड के नामचीन गायक आदित्य नारायण ने सबके जुबां में रची बसी फेमस गीत- पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा.., पहला नशा.. पहला खुमार.., बिन तेरे सनम.., जो तुम न हो..,अपना बना लो पिया, केशरिया इश्क है तेरा, वादा रहा सनम…, ये काली-काली आँखे.., कोई मिल गया, मेरा दिल गया…, जाने जा.., मैं निकला गड्ड़ी लेके..की प्रस्तुति से माहौल को उल्लासमय बना दिया और खूब तालियां बटोरी।

उनकी संवाद शैली, हाव-भाव और जीवंत अभिनय ने संगीत की गहराई को दर्शकों के सामने साकार कर दिया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में पद्मश्री डोमार सिंह कंवर की नाचा प्रस्तुति ने राज्योत्सव में ऊर्जा और उल्लास का वातावरण बना दिया। उनकी नाट्य शैली और छत्तीसगढ़ी हाव-भाव से सजी प्रस्तुति ने दर्शकों को लोककला की गहराई से जोड़ दिया। नाचा की पारंपरिक झलक और लोक संस्कृति की जीवंतता ने राज्योत्सव के मंच को अविस्मरणीय बना दिया।

राज्योत्सव की यह संध्या छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, संगीत और कलात्मक वैभव के साथ बॉलीवुड गीतों के आनंदमय प्रस्तुति राज्य के गौरवपूर्ण उत्सव बन गई। उपस्थित दर्शकों ने हर प्रस्तुति पर तालियों से अपनी प्रसन्नता जताई। यह सांस्कृतिक संध्या न केवल एक कार्यक्रम रही, बल्कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा का सजीव दस्तावेज बन गई, जहां हर गीत, हर नृत्य, और हर ताल में राज्य की समृद्ध कला और संस्कृति देखने को मिली।

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