रायगढ़। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायगढ़ ने दुल्हन साड़ी शो रूम (पैलेस रोड, गद्दी चौक) के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दुकान को उपभोक्ता को 7,870 रुपये का भुगतान करने के साथ 7,000 रुपये अतिरिक्त (मानसिक क्षति 5,000 व वाद व्यय 2,000) देने का आदेश दिया है। आयोग ने इस मामले को “स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार” की श्रेणी में माना है।
मामला दो साड़ियों का रंग, धुलाई में पूरी तरह उड़ा

परिवादी देवेन्द्र कुमार पाण्डेय (63), निवासी दरोगापारा रायगढ़ ने 13 अक्टूबर 2024 को दुल्हन साड़ी शो रूम से 5 साड़ियां कुल 13,920 रुपये में खरीदीं। दुकान की ओर से कपड़े की गुणवत्ता, रंग और प्रिंट को लेकर पूर्ण आश्वासन दिया गया था।
कुछ ही दिनों बाद जब ऑरेंज और पिंक कलर की दो साड़ियों (कीमत 3,980 और 3,890 रुपये) को धुला गया तो उनका रंग पूरी तरह निकल गया। उपभोक्ता ने शिकायत की तो दुकान ने वस्तु दोष स्वीकारते हुए Alteration एवं Chemical Wash के लिए खुद साड़ियां रख लीं और पावती भी दी।
दुकान ने समस्या स्वीकार कर भी समाधान नहीं किया
दुकान ने केमिकल वॉश करने के बाद 02.12.2024 को साड़ियां वापस लौटाईं। लेकिन साड़ियां खराब ही रहीं, रंग व स्वरूप नहीं सुधरा। उपभोक्ता ने पैसे लौटाने का आग्रह किया।उपभोक्ता का आरोप है कि दुकान प्रबंधन ने कीमत लौटाने से इनकार किया, बल्कि दुर्व्यवहार भी किया। विधिक नोटिस भेजने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दुकान आयोग के नोटिस के बावजूद एकपक्षीय रही, कोई प्रतिवाद या साक्ष्य नहीं दिया।
आयोग की सख्त टिप्पणी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायगढ़ के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल, सदस्य राजेन्द्र कुमार पाण्डेय और सदस्य श्रीमती राजश्री अग्रवाल की पीठ द्वारा जारी आदेश में कहा है कि दुकान ने शिकायत सही पाकर साड़ियां खुद ही केमिकल वॉश के लिए लीं। इसका अर्थ है कि पहली नज़र में ही दोष स्वीकार किया गया था। दुकान द्वारा बाद में दोष से इनकार करना असंगत है। रख-रखाव संबंधी कोई लिखित निर्देश भी नहीं दिए गए। उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी।
आयोग का आदेश
दुल्हन साड़ी शो रूम को आदेश दिया गया है कि 45 दिनों के भीतर दो साड़ियों का मूल्य 7,870 रुपये उपभोक्ता को लौटाया जाए। देरी होने पर वाद प्रस्तुति दिवस से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज देना होगा।मानसिक/आर्थिक क्षति के 5,000 रुपये। वाद व्यय 2,000 रुपये।दुकान अपक्ना वाद व्यय स्वयं वहन करेगी।
क्या कहता है यह फैसला?
यह निर्णय साफ करता है कि उपभोक्ता को गलत या दोषयुक्त वस्तु बेचना गंभीर जिम्मेदारी है। दुकानदार वस्तु दोष छुपाकर बच नहीं सकते।उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार की स्थिति में भी आयोग कठोर रुख अपनाता है। उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग सक्रिय और प्रभावी है।



