रायगढ़।
कला और साहित्य की पवित्र नगरी रायगढ़ के चक्रधर नगर स्थित बेलादुला में रविवार को एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन में समाज के सभी वर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसमें मातृशक्ति की सशक्त उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में लगभग 1200 से अधिक लोगों ने सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक बना दिया।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति सम्मेलन की मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त), रायपुर उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में हिंदू समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश डनसेना, संयोजक भारत भूषण डनसेना, सह-संयोजिका श्रीमती अनुपमा गुप्ता, उपाध्यक्ष श्रीमती ज्योति देवांगन सहित आत्मज चौहान, आनंद सिंह सिदार एवं बनसराम बरेठ विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।

जोशीला मंच संचालन, भावपूर्ण आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का मंच संचालन मंजू अवस्थी ने पूरे जोश और ऊर्जा के साथ किया, वहीं आभार प्रदर्शन प्रेमचंद्र मिश्रा जी द्वारा किया गया। बेलादुला बस्ती एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य स्वरूप प्रदान किया।
पंच परिवर्तन, संस्कृति और राष्ट्रबोध पर वक्ताओं का सारगर्भित उद्बोधन
सम्मेलन में वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए पंच परिवर्तन, कला-साहित्य, हिंदू संस्कृति एवं सामाजिक एकता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए आत्मबोध, संस्कार और सामूहिक चेतना अत्यंत आवश्यक है।
“हिंदू सम्मेलन नव-चेतना का जागरण है” डॉ. वर्णिका शर्मा
मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “देखिए, यह जो हिंदू सम्मेलन कराया जा रहा है, यह एक प्रकार से नव-चेतना का जागरण है। यहाँ समाज के सभी वर्ग के लोग एकमय होकर, एक सूत्र में पिरोए हुए एकत्रित हुए हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि—
“यहाँ उपस्थित जनसमूह यह दर्शाता है कि लोग अपने ‘स्व’ को पहचानने के लिए एकत्रित हुए हैं। अपने स्व से जुड़े वे सभी तत्व, जो राष्ट्र के पुनर्जागरण में बहुउपयोगी और बहुआयामी हैं, आज उन पर विचार हो रहा है।”
डॉ. शर्मा ने सरल शब्दों में समाज को संदेश देते हुए कहा “बहुत बड़े-बड़े शब्दों की आवश्यकता नहीं है, छोटी-छोटी महीन बातों को यदि हम समझ लें तो अपने परिवार, गृहस्थी और समाज को सुंदर बना सकते हैं।” उन्होंने हिंदुत्व और राष्ट्रीयता को जोड़ते हुए कहा कि “हिंदुत्व की जड़ों में ही अपनत्व है। और जहाँ अपनत्व है, वहीं राष्ट्रीयत्व प्रखर होता है। हम विश्व गुरु बनने वाले नहीं हैं, बल्कि हम विश्व गुरु हैं।”
समरस समाज निर्माण का आह्वान
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य स्व-बोध, नागरिक कर्तव्यों की समझ, पारिवारिक मूल्यों की पहचान और समरस समाज का निर्माण है, ताकि राष्ट्र को उसकी प्रखरता की ओर अग्रसर किया जा सके।
यादगार बना हिंदू सम्मेलन
समापन अवसर पर आयोजकों ने सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं, कार्यकर्ताओं और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। यह सम्मेलन संस्कार, संस्कृति, चेतना और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश देकर सभी के लिए यादगार दिवस बन गया।



