Home Blog बदलता मौसम, बढ़ती बीमारियां: जलवायु परिवर्तन पर रायगढ़ में स्वास्थ्य प्रशिक्षण अभियान

बदलता मौसम, बढ़ती बीमारियां: जलवायु परिवर्तन पर रायगढ़ में स्वास्थ्य प्रशिक्षण अभियान

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Changing weather, increasing diseases: Health training campaign on climate change in Raigad.

जलवायु परिवर्तन व मानव स्वास्थ्य को लेकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

Ro.No - 13672/140

06 से 15 जनवरी तक स्वास्थ्य अमले को दिया जा रहा चरणबद्ध प्रशिक्षण

रायगढ़, राज्य शासन के मंशानुरूप कलेक्टर रायगढ़ श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिले में जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 06 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत, प्रभारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. बी.पी. पटेल एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री रंजना पैंकरा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसमें जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. टी.जी. कुलवेदी, जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा, जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित शैलेंद्र कुमार मंडल, डॉ. केनन डेनियल, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. कल्याणी पटेल, आईडीएसपी कार्यक्रम के डीडीएम श्री रामकुमार जांगड़े सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हैं।

कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के सभी विकासखंडों से आर.एम.ए.प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, आर.एच.ओ. पुरुष/महिला, सी.एच.ओ., बी.डी.एम., डी.ई.ओ., पी.ए.डी.ए. तथा जिला एवं जनपद पंचायत के सदस्यों को समूहवार निर्धारित तिथियों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि वायु प्रदूषण का प्रभाव अब स्वास्थ्य सेवाओं में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। सांस फूलना, लगातार खांसी, आंखों में जलन, त्वचा रोग एवं अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ते वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ समाज की आधारशिला है, जिससे बीमारियों की रोकथाम के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यालयों, शासकीय कार्यालयों, पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण अभियान, स्वच्छता गतिविधियों एवं पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों से साइकिल अथवा पैदल चलने, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानव जीवन, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं आजीविका पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है। बढ़ता तापमान, असामान्य वर्षा, लू, सूखा, बाढ़, जलस्तर में गिरावट एवं वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी हैं। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है, जिससे हीट स्ट्रोक, सांस संबंधी रोग, एलर्जी, जलजनित बीमारियां एवं कुपोषण के मामलों में वृद्धि हो रही है, जिसमें बच्चों, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं पर अधिक प्रभाव पड़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण में रोग निगरानी पोर्टल पर रिपोर्टिंग प्रक्रिया, जलवायु से जुड़ी बीमारियों की पहचान, रोकथाम एवं आवश्यक उपायों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग, कचरे का पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण जैसे उपायों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

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