This time Holi will be celebrated with herbal gulal: Lalunga’s sisters created the color of success, selling 4 quintals out of 5 quintals produced.
कलेक्टोरेट परिसर में हुई जमकर खरीदी, रासायनिक मुक्त रंगों से सुरक्षित होली का संदेश

रायगढ़, जिले में इस बार होली का रंग कुछ खास है। रासायनिक रंगों की जगह प्राकृतिक और हर्बल गुलाल ने बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। इस सकारात्मक बदलाव की अगुवाई कर रही हैं लैलूंगा क्षेत्र की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जिन्होंने जैविक और सुरक्षित गुलाल तैयार कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है।
जिला कलेक्टोरेट परिसर में लगाए गए स्टॉल पर अधिकारियों, कर्मचारियों और बाहर से आए ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक हर्बल गुलाल की खरीदी की। प्राकृतिक रंगों की गुणवत्ता और सुरक्षा को देखते हुए लोगों में विशेष आकर्षण देखा गया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित दिव्या स्व-सहायता समूह सलखिया एवं संतोषी स्व-सहायता समूह रूडूकेला की महिलाओं ने मिलकर पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों से हर्बल गुलाल तैयार किया है। हल्दी, चुकंदर, लालभाजी, पालक भाजी, परसा फूल, संतरे के छिलके, लेमनग्रास तथा अन्य रंग-बिरंगे फूलों से तैयार यह गुलाल पूरी तरह रासायनिक मुक्त है और त्वचा के लिए सुरक्षित है।
महिलाओं ने लगभग एक माह पूर्व इस सीजनेबल व्यवसाय की शुरुआत की। त्योहारी मांग को ध्यान में रखते हुए 5 क्विंटल हर्बल गुलाल का उत्पादन किया गया, जिसमें से अब तक 4 क्विंटल की बिक्री हो चुकी है। जनपद पंचायत लैलूंगा परिसर में भी स्टॉल लगाकर अच्छी बिक्री की गई थी। वहीं कलेक्टोरेट परिसर में भी बड़ी संख्या में खरीदारों ने उत्साह दिखाया। एक दिन में हजारों रुपए का कारोबार कर समूह की महिलाओं का आत्मविश्वास और बढ़ गया है।
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने स्टॉल का अवलोकन कर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। स्व-सहायता समूहों को विभिन्न आयमूलक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इस प्रकार के नवाचार न केवल महिलाओं की आय बढ़ाते हैं, बल्कि समाज को सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्प भी प्रदान करते हैं। समूह की सदस्यों मीना कुमारी पैकरा, राम कुमारी पैकरा एवं आरती पटेल ने बताया कि जैविक गुलाल निर्माण के लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण मिला है तथा जिला प्रशासन का निरंतर सहयोग प्राप्त हो रहा है। हर्बल गुलाल के अलावा समूह गांव स्तर पर टेंट सेवा, सामाजिक आयोजनों में सहभागिता तथा छत ढलाई हेतु सेंटरिंग कार्य भी कर रहा है। इससे समूह की आय के विविध स्रोत विकसित हुए हैं।
समूह का मार्गदर्शन कर रहीं श्रीमती मंदाकिनी गुप्ता और कलावती सिदार ने बताया कि लैलूंगा, घरघोड़ा एवं तमनार जैसे वनांचल क्षेत्रों में स्व-सहायता समूह अत्यंत सक्रिय हैं और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में अग्रसर हैं। हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि लोग अब स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति सजग हो रहे हैं। प्राकृतिक रंगों से सुरक्षित होली मनाने का संदेश देते हुए ये महिलाएं आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बन रही हैं। यदि कोई व्यक्ति हर्बल गुलाल खरीदना चाहता है तो मोबाइल नंबर 62660-74792 पर संपर्क कर सकता है।



