- अमेरिका-ईरान समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर खुलेगा।
- भारत को तेल आपूर्ति, माल ढुलाई में मिलेगी राहत।
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता, तेल कीमतें घटेंगी।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय बाद आखिरकार एक व्यापक शांति समझौते पर सहमति बन गई है. इस डील का ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने का ऐलान कर दिया और दुनिया के लिए जरूरी इस समुद्री रूट को फिर से खोले जाने का ऐलान कर दिया.

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
ईरान और ओमान के बीच के इस संकरे जलमार्ग से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है और खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए निर्यात का मुख्य रास्ता है। ये सभी देश भारत को ऊर्जा की सप्लाई करने वाले अहम देश हैं।
तेल की कीमतों में आई गिरावट
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद रविवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता कर लिया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही हो सकेगी।
डोनल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया, “मैं इसके जरिए होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!”
युद्धविराम की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेल के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई। युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बाद ग्लोबल ऑयल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।



