एंटरटेनमेंट एंड ऑटो डेस्क:
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार बहुत तेजी से बदल रहा है। पेट्रोल-डीजल के बाद अब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की धूम है, लेकिन इसी बीच एक नई तकनीक की चर्चा हर तरफ है—ग्रीन हाइड्रोजन कार (Green Hydrogen Car)। जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी इस खास कार में बैठकर संसद पहुंचे, तो हर कोई हैरान रह गया। आम जनता के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि साइलेंस से धुएं की जगह ‘पानी’ छोड़ने वाली यह गाड़ी भारतीय शोरूम में कब आएगी और यह कितनी सस्ती या महंगी होगी?
कब आ रही है भारत की पहली हाइड्रोजन कार?
भारत में हाइड्रोजन कार की एंट्री सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी है। सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत देश में टोयोटा मिराई (Toyota Mirai) का दो साल का फील्ड ट्रायल (Field Trial) शुरू कर दिया है।
देश के मौसम, भारी ट्रैफिक और सड़कों के हिसाब से इस गाड़ी की कड़ी टेस्टिंग की जा रही है। जानकारों के मुताबिक, आम जनता के लिए इसे कमर्शियल तौर पर लॉन्च होने में थोड़ा समय लगेगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश भर में 400 से ज्यादा हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन तैयार करने का है, जिसके बाद ये कारें आम शोरूम्स में बिकने लगेंगी।
कीमत के मामले में जेब पर कितनी भारी?
अगर आप शुरुआती बजट की बात करें, तो हाइड्रोजन कारें फिलहाल आम आदमी की पहुंच से थोड़ी दूर रहने वाली हैं।
पेट्रोल कारें: 6 लाख से 15 लाख के बजट में आसानी से मिल जाती हैं।
इलेक्ट्रिक कारें (EV): भारतीय बाजार में 10 लाख से 25 लाख के बीच उपलब्ध हैं।
हाइड्रोजन कारें: चूंकि इसकी ‘फ्यूल सेल स्टैक’ टेक्नोलॉजी काफी एडवांस और महंगी होती है, इसलिए टोयोटा मिराई जैसी प्रीमियम हाइड्रोजन कार की शुरुआती अनुमानित कीमत 60 लाख या उससे अधिक हो सकती है।
चलाने का खर्च: पेट्रोल और EV से तुलना

गाड़ी खरीदने के बाद उसे रोज चलाने का खर्च (Running Cost) कितना आएगा, इसे इस आसान तुलना से समझा जा सकता है:
पेट्रोल कार: इसे चलाने का खर्च सबसे ज्यादा यानी करीब 7 से 10 प्रति किलोमीटर आता है।
हाइड्रोजन कार: इसका खर्च पेट्रोल से काफी कम, लगभग 4 से 5 प्रति किलोमीटर बैठने का अनुमान है।
इलेक्ट्रिक कार (EV): रनिंग कॉस्ट के मामले में ईवी अभी भी सबसे आगे है, जिसे चलाने का खर्च महज 1 से 2 प्रति किलोमीटर आता है।



