Home Blog तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खाते में पहुंच रही खुशियों की सौगात

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खाते में पहुंच रही खुशियों की सौगात

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  •  17.43 करोड़ रुपए का वितरण शुरू
  • धरमजयगढ़ जिला यूनियन की 58 समितियों में हो रहा बोनस वितरण
  • मुख्यमंत्री श्री साय की पहल से तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मिली बड़ी राहत

रायगढ़, 10 जुलाई 2026 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप की पहल से वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण सीजन के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का वितरण प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई 2026 से बोनस वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके तहत जिला यूनियन धरमजयगढ़ अंतर्गत तेन्दूपत्ता संग्राहकों को कुल 17 करोड़ 43 लाख रुपये की राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य तेन्दूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक संबल प्रदान करना है, जिससे वे कृषि कार्य, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से कर सकें।
वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला यूनियन धरमजयगढ़ के अंतर्गत 58 समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है, जिसमें अधिकतम दर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो में 4710.58 रूपये प्रति मानक बोरा दर प्राप्त हुई है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4616.76 रूपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक मिला है। जिला यूनियन धरमजयगढ़ के अंतर्गत 59 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से वर्ष 2023 सीजन में 70945.485 मानक बोरा संग्रहण हुआ था, इसके एवज में 46,840 हितग्राहियों को कुल 17 करोड़ 43 लाख रूपये का बोनस वितरण किया जा रहा है। इससे इन समितियों से जुड़े संग्राहकों में विशेष उत्साह का वातावरण देखा जा रहा है।

सीधे बैंक खातों में पहुंच रही राशि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

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वन विभाग द्वारा ऑनलाइन भुगतान प्रणाली के माध्यम से बोनस राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई है तथा हितग्राहियों को समय पर राशि प्राप्त हो रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों का कहना है कि बोनस राशि से उन्हें खेती-किसानी, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। समय पर मिली इस आर्थिक सहायता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी तथा संग्राहकों के चेहरों पर खुशी और संतोष साफ दिखाई दे रहा है।

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