Life imprisonment to Mukhtar Ansari, court sentenced him in 36 year old case, life imprisonment in fake arms license case
माफिया मुख्तार अंसारी को 33 वर्ष 3 महीने 9 दिन पुराने गाजीपुर के फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में उस पर दो लाख दो हजार का जुर्माना लगा है। माफिया मुख्तार की सजा को लेकर 54 पेज का फैसला आया है। फैसले के दौरान सफेद टोपी और सदरी पहने मुख्तार मुंह लटकाए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बांदा जेल से पेश हुआ। बांदा जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा अंतरराज्यीय गिरोह (आईएस-191) का सरगना और माफिया मुख्तार को आठवीं बार सजा हुई है।

दरअसल, मुख्तार अंसारी पर आरोप था कि उसने 1987 में फर्जी हस्ताक्षर के बल पर दुनाली बंदूक का लाइसेंस हासिल किया था. इसके लिए डीएम और एसपी के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे. इस मामले में तत्कालीन मुख्य सचिव अलोक रंजन और डीएम के डीएम की भी गवाही हुयी थी. मामले में 1997 में चार्जशीट दाखिल किया गया था. कोर्ट ने मंगलवार को मुख़्तार को दोषी करार दिया था.
जांच के बाद तत्कालीन आयुध लिपिक गौरीशंकर श्रीवास्तव और मुख्तार अंसारी के विरुद्ध 1997 में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान गौरीशंकर श्रीवास्तव की मृत्यु हो जाने के कारण उसके विरुद्ध 18 अगस्त 2021 को मुकदमा समाप्त कर दिया गया। अदालत में अभियोजन की ओर से एडीजीसी विनय कुमार सिंह और अभियोजन अधिकारी उदय राज शुक्ला ने पक्ष रखा।
ये हुई सजा
आईपीसी 467/120 बी में उम्रकैद व एक लाख जुर्माना।
420/120 बी में 7 वर्ष सजा व 50 हजार जुर्माना।
468/120 बी में 7 वर्ष की सजा व 50 हजार जुर्माना।
आर्म्स एक्ट में 6 माह सजा व दो हजार जुर्माना।
मुख्तार के वकील दलील
इससे अफ्ले बुधवार को सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के दौरान मुख्तार के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि घटना के समय उसकी उम्र सिर्फ 20 से 22 वर्ष थी और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था. वकील ने कहा कि मुख्तार उस समय जनप्रतिनिधि भी नहीं थे, शस्त्र खरीदने का साक्ष्य नहीं है. भ्रष्टाचार के आरोप से बरी हो गए हैं, ऐसे में इस अदालत को दोषी पाए गए धाराओं में सजा सुनाए जाने का अधिकार नहीं है. हालांकि, अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि प्रभाव का इस्तेमाल किया गया, जो समाज विरोधी अपराध है. सात मामलो में सजा सुनाई जा चुकी है. जिसमें उम्रकैद भी शामिल है. 20 मामले अभी लंबित हैं, ऐसे में अधिकतम सजा दी जाए.



