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Jaundice Test: पीलिया के लिए बच्चों का नहीं होगा ब्लड टेस्ट, बच्चों को छुए बगैर होगी पीलिया की जांच, इस डिवाइस से तीन सेकेंड में रिजल्ट

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Jaundice Test: Children will not have blood test for jaundice, jaundice will be tested without touching children, this device will give results in three seconds

लिवर की कमजोरी की वजह से होने वाला पीलिया(Jaundice) की जांच के लिए एक नई तकनीक विकसित की गई है। इसके जरिए नवजात शिशुओं को छुए बगैर महज सात सेकेंड में इसकी जांच हो सकेगी। इसमें ब्लड टेस्ट यानी खून की जांच की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। नवजात शिशुओं में पीलिया का खतरा 60 फीसदी तक रहता है, जबकि प्री-मैच्योर्ड डिलीवरी यानी समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में यह खतरा 70 फीसदी तक रहता है। दरअसल एक ऐसा उपकरण विकसित किया गया है, जो शिशु के नाखून पर प्रकाश की विशेष किरणें डालकर उसके ब्लड में बिलीरुबिन का स्तर बता देता है। इससे पता चल जाता है कि शिशु को पीलिया है या नहीं।

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क्या है पीलिया और बिलीरुबिन क्या होता है?
लिवर शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो कई शारीरिक और रासायनिक प्रक्रियाओं में शामिल होता है। यह शरीर में बनें जहरीले अपशिष्ट पदार्थों को कम हानिकारक तत्वों में बदलता है ताकि वे सुरक्षित तरीके से शरीर से बाहर निकाले जा सकें। इन्हीं अपशिष्ट पदार्थों में से एक है- बिलीरुबिन, जो पुराने हीमोग्लोबिन के अपघटन के दौरान बनता है। इसका रंग पीला होता है। लिवर इसे पित्तरस के साथ पाचनतंत्र तक पहुंचाता है। यहां से मल के रास्ते यह शरीर से बाहर होता है। लिवर के कमजोर होने पर यह प्रक्रिया बाधित होती है और बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ती जाती है। इस वजह से आंखों, त्वचा और नाखूनों में पीलापन दिखने लगता है। यही स्थिति पीलिया कहलाती है।

डिवाइस से कैसे होगी पीलिया की जांच
एक्सपर्ट बताते हैं कि माथे पर इस डिवाइस को लगाते ही बिलीरुबिन के स्तर का पता चल जाएगा. दरअसल, इसमें कुछ ऐसे सेंसर लगे हुए हैं जो माथे को टच करते ही बॉडी में बिलीरुबिन के लेवल को स्कैन कर लेते हैं. यह प्रक्रिया काफी सरल है. हालांकि यह डिवाइस मार्केट में अभी नहीं उपलब्ध है.

सिर्फ दो सेकेंड में पीलिया टेस्ट

डिवाइस बनाने वाले इंजीनियर जितेश पांडेय ने हिन्दुस्तान अखबार को बताया कि डिवाइस खून में बिलीरुबिन के स्तर को सिर्फ दो सेकंड में जांच करने में सक्षम है. बता दें कि ब्लड टेस्ट में बिलीरुबिन का लेवल पता करने में कुछ घंटे या फिर पूरे दिन तक तक लग जाता है.

480 नवजातों में किया गया डिवाइस का ट्रायल
मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्याम कुमार ने बताया कि पीलिया टेस्ट के लिए तैयार की गयी बिली श्योर नाम की डिवाइस का ट्रायल 480 नवजात बच्चों पर किया गया है. जिसमें 96 प्रतिशत परिणाम सटीक मिले हैं. जिसके बाद इस डिवाइस को बाजार में लाने की तैयारी शुरू कर दी गयी है.

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