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अमेरिका ने रूस से तेल और गैस इंपोर्ट पर लगाया बैन, जानें दुनिया के बाकी देशों पर कैसा होगा असर

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कल कार्यकारी आदेश जारी कर रूस से कच्चे तेल, कई पेट्रोलियम उत्पादों, तरल प्राकृतिक गैस और कोयले के आयात पर रोक लगा दी है. अमेरिका के बाइडेन प्रशासन ने दावा किया कि यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के बाद रूस वैश्विक अर्थव्यस्था के लिए अछूत’ हो गया है और विश्व समुदाय मॉस्को के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी पहल से जुड़ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस के खिलाफ घोषित आर्थिक प्रतिबंधों के पैकेज को ‘इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण’ करार दिया है और दावा किया है कि इससे रूसी अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचेगा.

बाइडेन ने कहा- रूसी अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है
रूस से तेल और गैस आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने के बाद बाइडेन ने कहा, ‘इससे रूसी अर्थव्यवस्था गर्त में चली गई है. (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन की ओर से घोषित युद्ध के बाद रूबल का करीब 50 फीसदी अवमूल्यन हुआ है और उसकी कीमत एक अमेरिकी सेंट से भी कम हो गई है’

रूस बन गया है अछूत- जो बाइडेन
बाइडेन ने कहा, ‘हमने रूस के सबसे बड़े बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग-थलग कर दिया है, जिससे मॉस्को की बाकी दुनिया के साथ कारोबार करने की क्षमता बाधित हो गई है.’ यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के जवाब में बाइडेन ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका रूस से तेल और गैस के आयात पर रोक लगाएगा. बाइडेन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बाद में कहा, ”हमारे ऐतिहासिक समन्वय से रूस वैश्विक अर्थव्यस्था और वित्तीय प्रणाली के लिए ‘अछूत’ बन गया है.”

रूस को होगा गहरा नुकसान- बाइडेन का दावा
उन्होंने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यस्था में लगभग 50 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले करीब 30 देशों ने रूस से तेल और गैस के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जिसका रूस पर आर्थिक स्तर पर तत्काल गहरा नुकसान पहुंचाने वाला असर पड़ेगा.’ अधिकारी ने कहा कि मॉस्को की उच्च प्रौद्योगिकी तक पहुंच रोक दी गई है, जिससे उसके विकास की संभावना बाधित होगी और आने वाले कई वर्षों के लिए उसकी सेना भी कमजोर होगी. उन्होंने दावा किया कि रूसी सेंट्रल बैंक को वैश्विक वित्त प्रणाली से काटकर अमेरिका ने रूस को विदेशी मुद्रा भंडार से वंचित कर दिया है और पुतिन के पास अपनी मुद्रा के अवमूल्यन को रोकने के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं. अधिकारी ने कहा, ‘लेन-देन को बाधित कर और रूस के सबसे बड़े बैंक की परिसंपत्ति को जब्त कर हमने पुतिन की विश्व के साथ कारोबार करने की क्षमता को बाधित कर दिया है.’

यूरोप के अन्य देशों का क्या है कहना-कैसा होगा असर
वहीं अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि रूस से तेल और गैस के आयात पर रोक लगाने से पहले उसने अपने यूरोपीय साझेदारों से चर्चा की थी. उसने माना कि फिलहाल सभी सहयोगी देश ऐसा प्रतिबंध लगाने की स्थिति में नहीं हैं. राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को कार्यकारी आदेश जारी कर रूस से कच्चे तेल, कई पेट्रोलियम उत्पादों, तरल प्राकृतिक गैस और कोयले के आयात पर रोक लगा दी थी. इसका उद्देश्य रूस को अमेरिकी चालकों और उपभोक्ताओं से सालाना मिलने वाले अरबों डॉलर के राजस्व से वंचित करना है. पिछले साल अमेरिका ने रूस से रोजाना औसतन सात लाख बैरल कच्चा तेला और परिस्कृत पेट्रोलियम उत्पाद का आयात किया था.

यूरोपीय साझेदारों से बात की गई थी पर वो इस कदम से जुड़ने की स्थिति में नहीं
बाइडेन प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इस कदम को उठाने से पहले हमने अपने यूरोपीय साझेदारों से करीबी चर्चा की, लेकिन उनसे हमें उम्मीद नहीं थी और हमने उनसे इसमें शामिल होने के लिए नहीं कहा.’ अधिकारी ने कहा, ‘अमेरिका यह कदम उठाने में सक्षम है, क्योंकि घरेलू स्तर पर हमारी मजबूत ऊर्जा उत्पादन क्षमता है. हम स्वीकार करते हैं कि इस मामले में फिलहाल हमारे सभी सहयोगी देश हमसे जुड़ने की स्थिति में नहीं हैं.’ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध नए सौदों पर लागू होगा. उन्होंने कहा कि हमने रूस से नयी खरीद पर रोक लगाई है, लेकिन पहले हो चुके करार के तहत हम तेल के आयात की अनुमति देंगे. पुराने सौदों के तहत आपूर्ति पूरी करने के लिए हम 45 दिन का समय दे रहे हैं.

अमेरिकी ग्राहकों पर भी पड़ रहा है असर
इस बीच, रूस से तेल और गैस के आयात पर रोक लगाने की घोषणा करते हुए बाइडेन ने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध से अमेरिकी परिवार प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि गैस के दाम बढ़ रहे हैं और इसमें और इजाफा होने की आशंका है. हालांकि बाइडेन ने वादा किया कि वह (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन द्वारा बढ़ाए गए दाम के असर को घरेलू स्तर पर कम करने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे.

अमेरिका में गैस के दाम 5-7 फीसदी बढ़ चुके हैं
प्रतिबंधों के कार्यकारी आदेश पर दस्तखत करने के बाद बाइडेन ने कहा कि पुतिन के युद्ध से पहले ही अमेरिकी परिवार प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि गैस के दाम बढ़ रहे हैं. पुतिन द्वारा यूक्रेन की सीमा पर सैनिकों का जमावड़ा करने के बाद से ही अमेरिका में गैस के दाम 75 सेंट तक बढ़ गए. इस प्रतिबंध से इसमें और वृद्धि होगी. ईंधन के दाम को स्थिर रखने को लेकर उठाए गए कदम पर राष्ट्रपति ने कहा, ”हम अपने सहयोगियों से समन्वय कर रहे हैं. हमने छह करोड़ बैरल तेल संयुक्त रूप से अपने आरक्षित भंडार (रिजर्व) से जारी करने की घोषणा की है. इसमें से आधा अमेरिका से आएगा. हम वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं.”

भारत सहित विश्व के अन्य देशों पर भी देखा जाएगा बड़ा असर
रूस पर लगे प्रतिबंधों से दुनिया के कई देशों पर पहले ही असर देखा जा रहा है और कच्चे तेल सहित गैस के दाम बढ़ रहे हैं. कच्चा तेल 139 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक जा चुका है. हालांकि भारत में अभी इसका असर घरेलू ग्राहकों पर नहीं डाला गया है और देश में पेट्रोल, डीजल के दाम में फिलहाल इजाफा नहीं किया गया है. हालांकि कहा जा रहा है कि आने वाले 1-2 दिन में दाम जरूर बढ़ने वाले हैं.

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