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रायगढ़ की सांसों पर मंडराता औद्योगिक संकट! शहर से सटे क्षेत्र में 814 करोड़ की परियोजना पर उठे बड़े सवाल

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गढ़उमरिया-दर्रामुड़ा में प्रस्तावित स्टील प्लांट और 50 मेगावाट पावर प्लांट की जनसुनवाई को लेकर बढ़ी चिंता, नागरिक बोले— विकास चाहिए, लेकिन जीवन की कीमत पर नहीं

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रायगढ़। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का सवाल एक बार फिर रायगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। शहर की सीमा से लगे गढ़उमरिया और दर्रामुड़ा क्षेत्र में मेसर्स रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित विशाल औद्योगिक परियोजना को लेकर नागरिकों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण के प्रति सजग लोगों के बीच चिंता का माहौल है।

करीब 814.5 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना में फेरो अलॉय संयंत्र के विस्तार के साथ एकीकृत इस्पात संयंत्र तथा 50 मेगावाट क्षमता के कैप्टिव पावर प्लांट की स्थापना की जानी है। परियोजना का कुल क्षेत्रफल 11.029 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परियोजना किसी दूरस्थ औद्योगिक क्षेत्र में नहीं, बल्कि रायगढ़ शहर से बेहद नजदीक स्थापित की जानी प्रस्तावित है।

 

शहर के करीब उद्योग, बढ़ी पर्यावरणीय चिंताएं

 

रायगढ़ जिला पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। तमनार, पूंजीपथरा, घरघोड़ा और धर्मजयगढ़ क्षेत्रों में संचालित उद्योगों से जुड़े प्रदूषण संबंधी मुद्दे समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा और शिकायतों का विषय बनते रहे हैं। ऐसे में शहर से सटे क्षेत्र में एक और बड़े औद्योगिक परिसर की स्थापना को लेकर नागरिकों के मन में स्वाभाविक रूप से अनेक सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील और फेरो अलॉय आधारित उद्योगों से निकलने वाले धूलकण, धात्विक कण, धुआं, गैसीय उत्सर्जन तथा राख जैसे तत्व पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए प्रस्तावित जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की पर्यावरणीय दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है।

 

परियोजना में क्या-क्या होगा स्थापित?

 

पर्यावरणीय दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार प्रस्तावित औद्योगिक परिसर में निम्न इकाइयों की स्थापना की योजना है।

• 2.145 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता का डीआरआई (स्पंज आयरन) संयंत्र

• 2.24 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता की स्टील मेल्टिंग शॉप

• 2 लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता की रोलिंग मिल

• 42,900 टन प्रतिवर्ष फेरो अलॉय उत्पादन इकाई

• 200 टन प्रतिदिन क्षमता का सिंटर प्लांट

• 10 टन प्रति घंटा मेटल रिकवरी यूनिट

• 15 टन प्रति घंटा रीहीटिंग फर्नेस

• 50 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर प्लांट

 

विकास बनाम स्वास्थ्य : किसे मिलेगी प्राथमिकता?

 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रोजगार और निवेश का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था प्रभावी नहीं रही तो आने वाले वर्षों में शहर की वायु गुणवत्ता और जीवन स्तर प्रभावित हो सकता है।

कई सामाजिक संगठनों ने नागरिकों से जनसुनवाई में भाग लेकर अपने विचार रखने की अपील की है ताकि परियोजना के संभावित लाभ और जोखिम दोनों पक्षों पर खुलकर चर्चा हो सके।

पर्यावरणविदों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में प्रस्तावित परियोजनाओं की जनसुनवाई के दौरान सक्रिय विरोध दर्ज कराने वाले कई पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता शहर के बेहद नजदीक स्थापित होने जा रही इस परियोजना को लेकर अब तक अपेक्षाकृत शांत क्यों हैं।

नागरिकों का कहना है कि जब मामला सीधे रायगढ़ शहर और यहां रहने वाले हजारों परिवारों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, तब व्यापक जनजागरूकता और सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

जनसुनवाई में उठ सकते हैं ये बड़े सवाल

प्रस्तावित परियोजना को लेकर आम नागरिकों के मन में कई महत्वपूर्ण प्रश्न हैं, जिनके स्पष्ट उत्तर जनसुनवाई के दौरान अपेक्षित हैं—

• परियोजना में प्रतिदिन कितनी जल खपत होगी?

• वायु प्रदूषण रोकने के लिए कौन-कौन से अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे?

• फ्लाई ऐश और अन्य औद्योगिक अपशिष्टों का सुरक्षित निपटान कैसे होगा?

• स्थानीय युवाओं को रोजगार में कितनी प्राथमिकता मिलेगी?

• पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी?

• क्या शहर के इतने निकट भारी उद्योग की स्थापना दीर्घकालिक जनहित में उचित है?

जनसुनवाई पर टिकी शहरवासियों की निगाहें

आगामी जनसुनवाई को लेकर रायगढ़ के नागरिकों की नजरें टिकी हुई हैं। यह केवल एक औद्योगिक परियोजना की स्वीकृति का मामला नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, पर्यावरण, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों की जीवन गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

अब देखना यह होगा कि जनसुनवाई में उठने वाले सवालों का उद्योग प्रबंधन, प्रशासन और सरकार किस प्रकार जवाब देते हैं और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए क्या ठोस आश्वासन सामने आते हैं।

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