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हर डगर दीप जलाकर जन से उजियारा का आव्हान, सरयू साहित्य द्वारा दीप पर्व पर उजियारा अभियान

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जनमानस से सार्वजनिक स्थलों प्रतिष्ठानों पर दीपक रखने का आग्रह

Ro.No - 13759/82

सनातन संस्कृति मे प्रत्येक पर्व त्यौहार मे विराट संदेश समाहित होता है तथा पर्व त्यौहार महज आनंद उल्लास का सबब ही नही वरन जीवन मूल्यों को समृद्ध करने परस्पर आत्मीयता बढ़ाने तथा वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को प्रसारित करने के अहम माध्यम होतें है,

बाजारवाद के आगमन का विपरीत प्रभाव

सौरभ बरवाड़/भाटापारा- आजकल लोगों के बीच एक चर्चा प्रत्येक पर्व त्यौहार के अवसर पर जरुर होती हुई नजर आती है और वह है अब त्यौहारों मे पहले जैसा आनंद नही,कमोबेश यह भाव अधिकतर लोगों के बीच नजर आता है,साथ ही साथ उन वजहों की ओर भी लोगों का ध्यान आकृष्ट होता हुआ नजर आता है जो पर्व त्यौहारों को प्रभावित करने के कारक है,तथा निष्कर्ष यही निकलता है कि बढ़ते संसाधनों एवं भौतिक समृद्धि ने जरुर पर्व त्यौहारों की भव्यता को बढ़ा दिया है लेकिन उसकी दिव्यता उसी चकाचौंध मे खोती हुई नजर आ रही है,तथा आम जनमानस उस भौतिक भव्यता के पीछे इस कदर लगा हुआ है कि अन्य महत्वपूर्ण चीजें बेमानी होती जा रही है लिहाजा पर्वो की समरसता शुष्कता मे बदलती हुई नजर आ रही है तथा पर्वों से जुड़ी महत्वपूर्ण परिपाटी एवं भाव पीछे छूटते हुए नजर आ रहें है।
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उजियारा बांटने का पर्व दीपोत्सव
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सनातन संस्कृति के प्रत्येक पर्व त्यौहार आपसी भागीदारी एवं आत्मीयता का पर्व है,दीपावली महापर्व केवल अपने घर की सजावट समृद्धि की अभिव्यक्ति एवं अपनी भव्यता इजहार का पर्व नहीं है वरन खुशियां एवं उजियारा बांटने का पर्व है दीपावली तथा इस महापर्व पर विभिन्न स्थलों पर दीपक रखकर उजियारा प्रकाशित करने एवं अंधेरा दूर करने का अनुष्ठान है, ग्रामीण क्षेत्रों मे अभी भी इस भाव की अभिव्यक्ति होती है तथा सार्वजनिक स्थलों तालाबों एवं विभिन्न जगहों पर दीप रखने की झलक दिखाई देती है,लेकिन शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव से यह उद्दात भाव एक तरह से धूमिल होती हुई नजर आ रही है,तथा भावना सिमटती हुई नजर आ रही है।
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सरयू साहित्य द्वारा उजियारा अभियान
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पर्व त्यौहारों के संदेशों एवं उसकी दिव्यता को अभिव्यक्त करने के लिए प्रयत्नशील नगर की रचनात्मक संस्था सरयू साहित्य परिषद द्वारा इस वर्ष दीपावली महापर्व के अवसर पर उजियारा अभियान संचालित किया जा रहा है जिसके तहत दीपावली के दिन विभिन्न सार्वजनिक प्रतिष्ठानों चौक चौराहों अन्य विभिन्न स्थलों दीप रखने का आव्हान किया जा रहा जिससे समूचा शहर उजियारे के सूत्र मे बंधा नजर आये एवं उजियारा बांटने का अहम संदेश सार्थक हो सके, इसी के तहत सरयू साहित्य परिषद के पदाधिकारियों एवं सदस्यों जिनमे गौरीशंकर शर्मा,मुकेश शर्मा पं दुर्गा प्रसाद तिवारी, हरिहर शर्मा, प्रकाश तिवारी, अजय तिवारी कविता शर्मा सरिता रानी शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, मोनू मानिक प्रसाद दुबे,अनिल ओझा,दिनेश शर्मा दुषेन्द्र तिवारी आदि द्वारा स्वयं डगर डगर उजियारा का संकल्प लेने के साथ ही जनमानस से इस दिशा मे भागीदारी का आव्हान किया गया है।

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