गौ संरक्षण जनआंदोलन बने, तभी बचेगी गौमाता : विशेषर सिंह पटेल
रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विशेषर सिंह पटेल शनिवार को रायगढ़ प्रवास पर रहे। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिक्षक वर्ग के प्रशिक्षण समापन कार्यक्रम तथा बैसपाली स्थित कृषक एवं गौसेवक प्रशिक्षण शिविर में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने गौ संरक्षण, संवर्धन एवं गौ-आधारित कृषि को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।

गौसेवा आयोग तीन प्रमुख बिंदुओं पर कर रहा कार्य
मीडिया से चर्चा करते हुए विशेषर सिंह पटेल ने बताया कि राज्य गौसेवा आयोग वर्तमान में तीन प्रमुख विषयों पर विशेष रूप से कार्य कर रहा है। इनमें गौ संरक्षण एवं संवर्धन, गोबर एवं गौमूत्र को अधिक उपयोगी बनाने के लिए अनुसंधान तथा गौ संरक्षण एवं विकास के लिए जनजागरण अभियान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गौवंश की सुरक्षा और विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
हर विकासखंड में 10 गौठानों का लक्ष्य
उन्होंने बताया कि गौ संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में 10-10 गौठानों के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गौठानों में चारा उत्पादन को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा प्रति एकड़ 47 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत पांच एकड़ क्षेत्र में चारा उत्पादन की योजना बनाई गई है। इसके अलावा गौशालाओं के लिए शेड निर्माण हेतु 5 लाख रुपये तक की सहायता तथा गायों के रखरखाव के लिए निर्धारित अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
गौ संरक्षण के लिए शासन के साथ
जनसहयोग भी जरूरी
विशेषर सिंह पटेल ने कहा कि गौमाता की रक्षा केवल सरकार का प्रयास ही नहीं , बल्कि इसके लिए समाज और आमजन की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनसहयोग से ही गौ संरक्षण एवं संवर्धन का व्यापक अभियान सफल हो सकता है। इसी उद्देश्य से राज्य गौसेवा आयोग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में गौ सेवा समितियों का गठन किया गया है।
गौ सेवा समितियों को मिली अहम जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि गठित गौ सेवा समितियों को गौशालाओं, गौठानों एवं गौधामों का नियमित निरीक्षण करने तथा वहां गौवंश की देखभाल और व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही समितियां गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को गौसेवा के प्रति जागरूक कर रही हैं।
गौ-आधारित खेती से बढ़ेगी पैदावार, घटेगी लागत
विशेषर सिंह पटेल ने
किसानों से गौ- आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गोबर और गौमूत्र आधारित खेती से कृषि उत्पादन बढ़ता है तथा खाद और बीज पर होने वाला खर्च कम होता है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा और लोगों को रासायनिक तत्वों से मुक्त शुद्ध एवं पौष्टिक अन्न प्राप्त होगा।
गोबर और गौमूत्र में छिपे हैं स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के सूत्र
विशेषर सिंह पटेल ने कहा कि गोबर और गौमूत्र का उपयोग अनेक प्रकार की औषधियों और जैविक उत्पादों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि गौ-आधारित कृषि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में गौमाता की महत्वपूर्ण भूमिका है और गाय के बिना मानव जीवन का समग्र उत्थान संभव नहीं है।
जन्मदिन पर प्रेम नारायण मौर्य के निवास पर हुआ सम्मान समारोह
रायगढ़ प्रवास के दौरान विशेषर सिंह पटेल का जन्मदिन भी उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर प्रेम नारायण मौर्य के निवास पर केक काटकर उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में घनश्याम पटेल (प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, भाजपा किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ एवं प्राधिकारी, सेवा सहकारी समिति पुसौर), बंशीधर बेहरा (अध्यक्ष, जिला गोधाम समिति रायगढ़), विजय डनसेना (ब्लॉक अध्यक्ष खरसिया), हुकुम सिंह यादव (ब्लॉक अध्यक्ष रायगढ़), नीरज यादव (सोशल मीडिया प्रभारी भाजपा बिलासपुर), बी.आर. पटेल, विजय नारायण मौर्य, रवि प्रताप मौर्य, अंश प्रताप एवं संदीप सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बैसपाली और चांपा की गौशालाओं का करेंगे निरीक्षण
अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत विशेषर सिंह पटेल आचार्य श्री गौशाला जीवरक्षा संस्थान, बैसपाली (रायगढ़) पहुंचे, जहां गौ सेवा गतिविधि विभाग रायगढ़ एवं आचार्य श्री गौशाला समिति द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने भाग लिया। इसके पश्चात उनका कार्यक्रम भारतीय कुष्ठ निवारण संघ की गौशाला, कात्रेनगर (चांपा), जिला जांजगीर-चांपा में आयोजित गौशाला निरीक्षण एवं समीक्षा कार्यक्रम में शामिल होने का रहा।
“गौ संरक्षण केवल अभियान नहीं, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संकल्प है”
विशेषर सिंह पटेल ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और गौ संरक्षण के माध्यम से कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। इसके लिए शासन, समाज और किसानों को मिलकर कार्य करना होगा।



