*लू -तापाघात के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी*

सौरभ बरवाड़/बलौदाबाजार-2 अप्रैल 2026/ कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बढ़ती गर्मी और संभावित लू की स्थिति को ध्यान में रखते हुए शासन के निर्देशानुसार लू-तापघात से बचाव एवं आवश्यक तैयारी के लिए अपर कलेक्टर अभिषेक कुमार गुप्ता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। लू (तापघात) प्रबंधन एवं बचाव के सम्बन्ध में भारत सरकार गृहमंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा आवश्यक तैयारी एवं बचाव के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी किया गया है।
*लू के लक्षण*-सिर में भारीपन और दर्द होना, तेज बुखार के साथ मुह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना,कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, बरीर का तापमान अधिक हो जाने के बाद भी पसीने का न आना, अधिक प्यास और पेशाब कम आना, भूख कम लगना, बेहोश होना।
*लू से बचाव के उपाय*- लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज मुख्यतः नमक की कमी हो जाना होता है। इससे बचाव के लिये बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर ना जाये। धूप में निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बाथ ले। पानी अधिक मात्रा में पीये। अधिक समय तक धूप में न रहे। गर्मी के दौरान नरन मुलायम सूती कपड़े पहनने चाहिए ताकि हवा और कपडे पसीने को सोहाते रहे। अधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस घोल पीये। चक्कर आने, उल्टी आने पर छावादार स्थान पर विश्राम करे तथा शीतल पेय जल अथवा उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करे। प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से नि शुल्क परामर्श लिया जाते। उल्टी, सर दर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र से जरूरी सत्ताह लिया जाये।
*लू लगने पर किये जाने वाला प्रारंभिक उपचार*-बुखार पीड़ित व्यक्ति के सर पर ठण्डे पानी की पट्टी लगायें। अधिक पानी व पेय पदार्थ पिलायें जैसे कच्चे आम का पना, जल जीरा आदि। पीड़ित व्यक्ति को पये के नीचे हया में लिटा देये। शरीर पर ठण्डे पानी का छिड़काव करते रहे। पीड़ित व्यक्ति को यथाशीघ्र किसी नजदीकी चिकित्सा केन्द्र में उपचार हेतु ले जावे। मितानिन, एएनएम से ओआरएस के पैकेट हेतु संपर्क करें।
*हीट वेव में क्या करें* -जितना हो सके पर्याप्त पानी पिए, भले ही प्यास न लगी हो। मिर्गी हृदय, गुर्दे व लीवर से संभावित रोग बाले जो तरल प्रतिबंधित आहार लेते हो. तरल पदार्थ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले। हल्के, हल्के रस के, ढीले सूती कपड़े पहने। ओआरएस घोल, घर का बना पेय लस्सी, (बोरे बासी) चावल का पानी, नीबू का पानी, छाछ, आदि का उपयोग करें। बाहर जाने से बचे। यदि बाहर जाना आवश्यक है, तो अपने सिर (कपडे/टोपी या छाता) और चेहरे को ढकें। जहां तक समय हो किसी भी सतह को छूने से बचे।
*क्या न करें*-गर्मी के दौरान बाहर न जाएं। यदि आपको आवश्यक कार्य के लिए बाहर जाना है, तो दिन के सीतलन घंटों के दौरान अपनी सारणी निर्धारित करने का प्रयास करें। अत्यधिक गर्मी के घंटों के दौरान बाहर जाने से बचे विशेष रूप से बोपहर 12.00 बजे नी 3.00 बजे के बीच। नंगे पैर या बिना चेहरे को ढके और बिना सिर ढककर बाहर न जाएं। व्यस्थतम समय (दोपहर) के दौरान खाना पकाने से बचें। खाना पकाने वाले क्षेत्रों (रसोई घरों) में दरवाजे और खिड़किया खोल कर रहो, जिससे पर्याप्त रूप से हवा आ सके । शराब, चाय, कॉफी और कार्बाेनेटेड पेय पीने से बचे जो शरीर को निर्जलित करते हैं। उच्च प्रोटीन, मसालेदार और तेलीय भोजन खाने से बचें, बासी खाना न खाए। बीमार होने पर बाहर धूप में न जाए घर पर रहें।
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