Today Ashadh Amavasya is very special, do the Tarpan of ancestors with this method, you will get freedom from sins! Happiness will come in life, know the auspicious time and importance
आषाढ़ अमावस्या माह में आने वाली अमावस्या का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। हालांकि यह तिथि धार्मिक कार्यों के लिए बहुत कल्याणकारी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन पवित्र नदियों में स्नान, कालसर्प दोष (Kaal sarp dosh), शनि दोष (Shani dosh), गृह दोष निवारण, पितरों का तर्पण और दान आदि के लिए अच्छा माना जाता है, तो चलिए पितृ तर्पण कैसे करना चाहिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं?

आषाढ़ अमावस्या पर पितृ तर्पण की विधि
पितरों का तर्पण करने के लिए आपको आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।
इसके बाद स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र आपको धारण करने चाहिए।
संभव हो तो इस दिन किसी नदी के किनारे पितरों को तर्पण दें। ऐसा संभव नहीं है तो अपने घर की बालकनी या छत में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, जल की कुछ बूंदें अपने हाथों में डालें और साथ ही पुष्प, अक्षत हाथ में रखकर सबसे पहले पितरों का आवाहन करें। इसके बाद एक पात्र में जल लेकर पितरों का तर्पण करना शुरू करें।
‘ओम आगच्छन्तु में पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम’ मंत्र का जप करते हुए आप पितरों का तर्पण कर सकते हैं।
पितरों का स्मरण भी आपको तर्पण देते समय अवश्य करना चाहिए।
पितरों को अर्पित किए जाने वाले जल में आपको कुश, तिल, फूल इत्यादि मिश्रित करने चाहिए।
तर्पण करने के बाद दाहिने हाथ से जमीन को छूकर आशीर्वाद लें, अगर नदी में तर्पण कर रहे हैं तो नदी के जल को छुएं।
पितरों के निमित्त इस दिन आपको अन्न, जल, वस्त्र इत्यादि का दान सामर्थ्य अनुसार करना चाहिए, साथ ही ब्राह्माणों को भोजन कराना भी इस दिन पुण्य फलदायी माना गया है। माना जाता है कि अमावस्या के दिन किया गया दान आपके पितरों को प्रसन्न करता है। साथ ही उनके आशीर्वाद से आपके जीवन में भी खुशहाली आती है।
अगर दान करने में समर्थ न हों तो इस दिन कुत्तों या कोओं को कुछ न कुछ जरूर खिलाएं।
इस सरल विधि से भी अगर आप अपने पितरों का तर्पण अमावस्या के दिन कर देते हैं तो आपके जीवन में खुशियां आती हैं। धन-धान्य की आपको प्राप्ति होती है।
आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त (Ashadha Amavasya 2024 Shubh Muhurat)
आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि 5 जुलाई यानी आज सुबह 4 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 6 जुलाई को सुबह 4 बजकर 26 मिनट पर होगी. उदयातिथि के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 5 जुलाई यानी आज ही मनाई जा रही है.
अमावस्या पर पितृ तर्पण के लाभ
अमावस्या पर पितरों का तर्पण श्रद्धापूर्वक करने से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी दूर हो जाती है और कुंडली में पितृदोष के बुरे प्रभाव से बचाव होता है. पितरों का तर्पण करने से मानसिक और शारीरिक लाभ देखने को मिलते हैं. पितरों का आशीर्वाद करियर और आर्थिक कार्यों में भी सफलता दिलाता है.
आषाढ़ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और दान बहुत लाभकारी माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि पितरों के निमित्त दान करने से पितृ अपना आशीर्वाद देते हैं जिससे पारिवारिक शांति बनी रहती है.
शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन गंगा स्नान करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और घर में मौजूद नकारात्मकता दूर होती है. साथ ही इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के पाप भी धुल जाते हैं और व्यक्ति के आतंरिक और बाहरी सभी प्रकार के दोष भी दूर होते हैं.
आषाढ़ अमावस्या नियम (Ashadha Amavasya Niyam)
इस दिन का व्रत बिना कुछ खाए पिए रहा जाता है. अमावस्या तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर गायत्री मंत्र का 108 बार जप करें और सूर्य और तुलसी को जल अर्पित करें. इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. गाय को चावल अर्पित करें. तुलसी को पीपल के पेड़ पर रखें. इसके साथ ही इस दिन दही, दूध, चंदन, काले अलसी, हल्दी, और चावल का भोग अर्पित करें. पेड़ के चारों ओर 108 बार धागा बांधकर परिक्रमा करें. विवाहित महिलाएं चाहें तो इस दिन परिक्रमा करते समय बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, आदि भी रख सकती हैं. इसके बाद पितरों के लिए अपने घर में भोजन बनाएं और उन्हें भोजन अर्पित करें. गरीबों को वस्त्र, भोजन, और मिठाई का दान करें. गायों को चावल खिलाएं.
आषाढ़ अमावस्या महत्व (Ashadha Amavasya Significance)
अमावस्या व्रत व्यक्ति को हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से सुरक्षित रखने के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है. इसके साथ ही यह सभी बुरी शक्तियों के प्रभाव को कम करने में भी बेहद कारगर होता है. अपने पितरों की आत्मा को प्रसन्न करने के लिए अमावस्या व्रत का महत्व बहुत अधिक माना गया है. इस दिन मुमकिन हो तो अपने पूर्वजों के लिए खाने पीने का सामान अवश्य निकालें. इसके अलावा माना जाता है कि जो कोई भी व्यक्ति अमावस्या का व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. विधि विधान के साथ अमावस्या का व्रत किया जाए तो व्यक्ति की कुंडली में मौजूद काल सर्प दोष के हानिकारक प्रभाव कम होने लगते हैं.



