Service lands of government servants will be returned to the government
पुसौर:सेवा भूमि एवं सामान्य मानदेय राषि के एवज में राजस्व विभाग के अधीन ग्राम में सेवा दे रहे झाखर चौकीदार एवं कोटवारों की सेवा भूमि पिछले कुछ वर्शो से इनके नाम दर्ज किया जाकर उन्हें विधिवत् षासन से ऋण पुस्तिका जारी हुई है ऐसे स्थिति में कई झाखर कोटवार चौकीदार इसे विक्रय कर संबंधित राषि का निजी उपयोग किये हैं। षासन के नियमानुसार सेवा भूमि होने के कारण संबंधित भूमि अहस्तान्तरणीय है जिसका केवल उपभोग किया जा सकता है बेचा नहीं सकता बावजुद इसके बेचा गया है और संबंधितों ने करोडों रूपये अर्जित भी की है। ज्यादातर षासकीय सेवा भूमि रोड किनारे ही होता है जो भू माफियाओं और व्यवसायियों अथा निजी कंपनियों के लिये किसी हीरे जवाहरत से कम नहीं होता ऐसे स्थिति में विभाग के लोगों और संबंधित कोटवार झांखर को झांसे में लेकर संबंधित जमीन को हासिल कर अपना प्रतिश्ठान भी स्थापित कर चुके हैं। पुसौर क्षेत्र में सोढापाठ चौक, स्टैट बैंक के आसपास ऐसे बेष किमती झांखरी जमीन है जहां लोग एक सामान्य स्टाम में खरीद कर अपना अपना मकान, दुकान, स्कुल आदि पिछले सालों से स्थापित कर चुके हैं। अब इतने सालों से पजेषन में रहे लोगों को विस्थापित करते हुये संबंधित भूमि षासन कैसे वापस लेगी यह तो पता नहीं लेकिन ये तय है कि दोनों पक्ष के हाथ पांव जरूर फुल जायेंगे। जानकारों की माने तो ये ब्रिटिष कार्यकाल के पूर्व से ही झांखर कोटवार वंषानुक्रम में सेवा देते हुये आ रहे हैं और सेवा भूमि का उपभोग करते रहे हैं और वही ब्रिटिष षासन के अधीन रहकर राजा, जमीदार, गौटिया, मुनादी करने वाले/नरियाही/, सहित अन्य सेवादार भी वंषानुक्रम में आजाद भारत तक सेवा दिये है जिन्हें प्रदाय किया गया जमीन आज उनके नाम में दर्ज है और इन झांखर चौकीदारों के सेवा भूमि जो उनके नाम में दर्ज हो चुका उसे वापस लिये जाने का षासन का यह निर्णय कहां तक न्यायोचित है और ये दोहरा स्थिति कैसे ? ये तो तय है कि ब्रिटिष कार्यकाल में राजकीय सेवा देने वाले एवं उनके सेवादारों को भूमि आबंटित की गई है जिसमें झांखर चौकीदार कोटवार को छोडकर सब अपने अपने नाम में करा लिये और वे आज सैकडों एकड के मालिक बन चुके हैं जिसके एवज में समाज और षासन पक्ष में उनका गहरा पैठ बना हुआ है लेकिन अषिक्षित व जागरूक नहीं होने के कारण इनके सेवाभूमि में आज भी सवाल खडे हो रहे हैं।




