PM मोदी की विदेश यात्राओं पर खर्च हुए ₹362 करोड़:
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राएं हमेशा सुर्खियों में रही हैं, खासकर उनके खर्च को लेकर विपक्ष अक्सर सवाल उठाता रहा है। हालांकि, इन यात्राओं को भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने, राजनयिक लाभ प्राप्त करने, वैश्विक सहयोग बढ़ाने और व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने का एक महत्वपूर्ण जरिया माना जाता है। हाल ही में राज्यसभा में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2021 से लेकर 2025 के बीच पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल ₹362 करोड़ खर्च हुए हैं।

2021 से 2024 तक का खर्च: कोविड के बाद बढ़ी सक्रियता
विदेश मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 से 2024 तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल ₹295 करोड़ खर्च हुए हैं। कोविड-19 महामारी के बाद प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रियता लगातार बढ़ी है, और इसका सीधा असर वार्षिक खर्च में भी दिखा है:
- 2021: ₹36 करोड़
- 2022: ₹55 करोड़
- 2023: ₹93 करोड़
- 2024: ₹100 करोड़
यह वृद्धि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और विभिन्न देशों के साथ संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
साल 2025 में हुए खर्च का ब्योरा
साल 2025 में अब तक पीएम मोदी ने 14 देशों की यात्राएं की हैं, जिनमें थाईलैंड, अमेरिका, सऊदी अरब, फ्रांस और श्रीलंका प्रमुख हैं। इन यात्राओं का कुल खर्च ₹66.8 करोड़ रहा है। देश-वार खर्च का विवरण इस प्रकार है:
- फ्रांस: ₹25.5 करोड़
- अमेरिका: ₹16.5 करोड़
- सऊदी अरब: ₹15.5 करोड़
- थाईलैंड: ₹4.9 करोड
- श्रीलंका: ₹4.4 करोड़
किसी भी दौरे का खर्च उस देश की दूरी, यात्रा के दिनों की संख्या और वहां होने वाले कार्यक्रमों पर निर्भर करता है।
सबसे महंगी विदेश यात्राएं
साल 2021 से अभी तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं में अमेरिका का दौरा सबसे महंगा रहा है। उन्होंने इस दौरान चार बार अमेरिका की यात्रा की है, जिस पर कुल ₹74.44 करोड़ का खर्चा आया है।
अमेरिका के अलावा, फ्रांस और जापान की यात्राओं पर भी बड़े खर्चे हुए हैं:
- फ्रांस: पीएम ने तीन बार फ्रांस की यात्रा की, जिस पर ₹41.29 करोड़ का खर्च आया।
- जापान: पीएम तीन बार जापान भी गए हैं, जहां पर ₹32.96 करोड़ का खर्च आया था।
ये यात्राएं भारत की वैश्विक कूटनीति का अभिन्न अंग हैं, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, बहुपक्षीय मंचों पर भारत की आवाज बुलंद करना और देश के आर्थिक हितों को बढ़ावा देना है।



