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नलिनी-कमलिनी की कथक प्रस्तुति ने बाँधा समा

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Nalini-Kamalini’s Kathak performance enthralled the audience

40वें चक्रधर समारोह के समापन पर कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम

Ro.No - 13672/140

रायगढ़
40वें चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना पद्मश्री सुश्री नलिनी-कमलिनी की जोड़ी ने अपनी अद्वितीय नृत्य-प्रस्तुति से ऐसा समां बाँधा कि दर्शक देर तक मंत्रमुग्ध रहे। दोनों बहनों ने कथक नृत्य की हर गति, भाव और अभिव्यक्ति में ऐसी पूर्णता और सौंदर्य का परिचय दिया, जो उनके वर्षों की साधना और समर्पण को दर्शाता है।

गुरु परंपरा की छाप

वाराणसी के सुप्रसिद्ध कथक गुरु पं. जितेन्द्र महाराज की शिष्याएं नलिनी-कमलिनी की यह प्रस्तुति केवल नृत्य का प्रदर्शन भर नहीं थी, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत दर्शन भी थी। मंच पर उनके हर पदचाप और भाव में गुरु परंपरा की गहरी छाप दिखाई दी।

विश्वभर में गूँजी भारत की संस्कृति

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी कला का लोहा मनवा चुकीं इन बहनों ने ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, नार्वे, पश्चिमी जर्मनी और मध्य-पूर्व देशों में भारत की सांस्कृतिक गरिमा का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, लीडेन और मैनचेस्टर जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों में व्याख्यान-प्रदर्शन देकर भारतीय संस्कृति की चेतना का प्रसार किया है।

सम्मानों से अलंकृत युगल

दिल्ली दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार नलिनी-कमलिनी को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों से सम्मान मिल चुका है। इन्होंने इनर लंदन एजुकेशनल अथॉरिटी के लिए एक शैक्षिक वृत्तचित्र भी तैयार किया है।

संत-कवियों को कथक की भाषा

नलिनी-कमलिनी बहनों ने सूरदास, तुलसीदास, कबीर, रहीम, बुल्लेशाह और अमीर खुसरो जैसे संत-कवियों की अमर रचनाओं को कथक की नृत्य-भाषा देकर उन्हें एक नया, सजीव आयाम प्रदान किया है।

चक्रधर समारोह के इस भव्य समापन अवसर पर नलिनी-कमलिनी की अनुपम प्रस्तुति ने न केवल दर्शकों को अभिभूत किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा और गौरव को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

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