
श्रीलंका एवं आसाम की मनमोहक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी
राष्ट्रीय रामायण मेला के समापन अवसर पर विधायक इन्द्र साव ने शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेट कर कलाकारों को सम्मानित किये
सौरभ बरवाड़/भाटापारा – राष्ट्रीय रामायण मेला का उद्देश्य केवल आयोजन नहीं बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ो से जोड़ना है। यह मेला हमे हमारी पहचान, हमारी संस्कृति परम्परा और संस्कारो की याद दिलाता है। मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहता हूॅ आप आधुनिक तकनीक अपनाइए खूब आगे बढ़िए लेकिन संस्कार और संस्कृति को कभी न भूलिए रामायण को सिर्फ पढ़िए नहीं, रामायण से जीने का प्रयास कीजिए। उक्त बाते राष्ट्रीय रामायण मेला के मुख्य अतिथि इन्द्र साव ने समापन अवसर पर कहा उन्होंने आगे कहा
रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं है रामायण हमारे जीवन जीने की कला है। यह हमें सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग, करूणा और कर्तव्य का मार्ग दिखाती है। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्ता, सेवा के लिए होती है, शक्ति संयम के लिए होती है और धर्म किसी एक के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के कल्याण के लिए होती है।
माता सीता का त्याग, लक्ष्मण का समर्पण, हनुमान जी की निष्ठा और भरत का भाईचारा ये सभी आदर्श आज भी हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को दिशा देने की क्षमता रखते है। विधायक इन्द्र साव ने श्री लंका ,आसाम सहित विभिन्न क्षेत्रो से आये कलाकार, रामायणी, कथा वाचक, मानस मर्मज्ञ एवं आयोजकों का सम्मान किया। पंच दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेला का यह दूसरा वर्ष का आयोजन बहुत हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ । विधायक इन्द्र साव ने सफल आयोजन के लिए समिति के संयोजक ललित सिंह ठाकुर, अध्यक्ष बिहारी लाल अग्रवाल, भंवर सिंह साहू, मोहन केसरवानी, कल्याण सिंह ठाकुर, रमेश वर्मा,सत्यनारायण पटेल, डॉ. वीणा साहू, अरुण छाबड़ा, गौरी भृगु, सीमा मल, नीरा साहू, सती साहू,विनोद गुप्ता सहित स्थानीय रामलीला मंडली के सदस्यों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुख्यरूप से ईश्वर सिंह ठाकुर, राजकुमार शर्मा, रोशन हबलानी, दिवाकर मिश्रा, वैभव केसरवानी, मुकेश साहू, मोहन निषाद, संजय केसरवानी, विमल शर्मा, जीत नारायण साव, रानू बरवाड़ सहित सैकड़ो नगरवासी उपस्थित थे ।



