Home छत्तीसगढ़ बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की उत्कृष्ट, तत्पर एवं ठोस विवेचना से मिली बड़ी सफलता

बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की उत्कृष्ट, तत्पर एवं ठोस विवेचना से मिली बड़ी सफलता

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● *नाबालिग बहनों के अपहरण व दुष्कर्म के दोहरे मामलों में दोषी सनत साहू को आजीवन कारावास*

Ro.No - 13954/82

● *माननीय विशेष पॉक्सो न्यायालय, भाटापारा ने अभियुक्त को दोनों प्रकरणों में सुनाई उम्रकैद व 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा*

● *अंतर्राज्यीय सर्च ऑपरेशन चलाकर पुलिस ने दोनों पीड़िताओं को महाराष्ट्र से सुरक्षित बरामद कर परिजनों को सौंपा था*

● *वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन, पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण और समयबद्ध चार्जशीट ने अदालत में सुनिश्चित की ऐतिहासिक सजा*

सौरभ बरवाड़/भाटापारा- दिनांक: 22.09.2026- महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को साबित करते हुए बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस द्वारा की गई प्रभावी विवेचना के फलस्वरूप माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो), भाटापारा (पीठासीन अधिकारी: श्री सतीश कुमार जायसवाल, अपर सत्र न्यायाधीश) द्वारा दो अलग-अलग गंभीर मामलों में अभियुक्त सनत साहू को आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया है।

*प्रकरण का संक्षिप्त विवरण:*- थाना सिमगा अंतर्गत वर्ष 2022 में एक अवयस्क बालिका की गुमशुदगी दर्ज हुई थी, जिसमें अनुसंधान के दौरान अभियुक्त द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने व दैहिक शोषण का तथ्य सामने आने पर अपराध दर्ज किया गया। इसके उपरांत माह अगस्त 2024 में अभियुक्त द्वारा पीड़िता की छोटी अवयस्क बहन को भी झांसे में लेकर अन्यत्र ले जाया गया। दोनों पीड़िताओं के अनुसूचित जाति वर्ग से होने के कारण मामलों में पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कठोर धाराएं जोड़ी गईं।

*बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की कार्यप्रणाली व विवेचना के प्रमुख बिंदु:*
1. अंतर्राज्यीय समन्वय व त्वरित बरामदगी: पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों व मुखबिर सूचनाओं के आधार पर महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में सघन दबिश दी। योजनाबद्ध ऑपरेशन चलाते हुए दोनों बालिकाओं को सुरक्षित दस्तयाब कर सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया।
2. दस्तावेजी साक्ष्यों का मजबूत संकलन: प्रकरण के विचारण में पीड़िताओं की उम्र का निर्धारण अत्यंत निर्णायक था। पुलिस विवेचकों ने स्कूल के मूल दाखिल-खारिज (प्रवेश) रजिस्टर व शैक्षणिक प्रगति पत्रों को विधिवत जप्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसे अदालत ने प्राथमिक व अकाट्य साक्ष्य माना।
3. फोरेंसिक व मेडिकल साक्ष्य: पीड़िताओं की सहमति से विधिवत डॉक्टरी मुलाहिजा, स्लाइड/स्वाइब संकलन एवं आवश्यक जप्ती की प्रक्रिया पूर्ण कर केस को वैज्ञानिक रूप से सुदृढ़ किया गया।
4. समयबद्ध चालान व सतत पैरवी: विवेचना अधिकारियों (तत्कालीन थाना प्रभारी डीएसपी योगिता खापर्डे, तत्कालीन एसडीओपी ऐश्वर्य चंद्राकर, सहायक उप निरीक्षक एस.के. कुरैशी एवं टीम) द्वारा निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया। विशेष लोक अभियोजक श्री संजय बाजपेयी के साथ निरंतर समन्वय स्थापित कर अदालत में साक्ष्यों को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया।

*दोषी अभियुक्त का विवरण:*- सनत साहू, पिता गोकुल साहू, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम कचलोन, थाना सिमगा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा।

*माननीय न्यायालय द्वारा पारित दंडादेश:*
1. विशेष प्रकरण 71/2024 (अपराध क्रमांक 443/2022, थाना सिमगा):
• दोषसिद्धि: भा.दं.सं. धारा 363, 366, 376(2)(n), पॉक्सो एक्ट धारा 5(L)/6 एवं एससी/एसटी एक्ट धारा 3(2)(v)
• दंडादेश: आजीवन कारावास (एससी/एसटी एक्ट), 20 वर्ष का कठोर कारावास (पॉक्सो एक्ट), 05 वर्ष कठोर कारावास (धारा 366 भादंसं), 03 वर्ष कठोर कारावास (धारा 363 भादंसं) एवं अर्थदंड। (सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी)

2. विशेष प्रकरण 72/2024 (अपराध क्रमांक 293/2024, थाना सिमगा):
• दोषसिद्धि: बी.एन.एस. धारा 137(2), 87, 65(1), पॉक्सो एक्ट धारा 4(2) एवं एससी/एसटी एक्ट धारा 3(2)(v)
• दंडादेश: आजीवन कारावास (एससी/एसटी एक्ट), 20 वर्ष का कठोर कारावास (पॉक्सो एक्ट), 05 वर्ष कठोर कारावास (धारा 87 बीएनएस), 03 वर्ष कठोर कारावास (धारा 137(2) बीएनएस) एवं अर्थदंड। (सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी)

*(माननीय न्यायालय द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), बलौदाबाजार को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत पीड़िताओं को क्षतिपूर्ति राशि प्रदाय करने हेतु भी आदेशित किया गया है।)*

*आम जनता से अपील:*- बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस आम नागरिकों व पालकों से अपील करती है कि बच्चों की सुरक्षा व गतिविधियों पर विशेष ध्यान रखें। किसी भी बच्चे के लापता होने या संकटग्रस्त होने की स्थिति में तत्काल निकटतम थाने अथवा डायल-112 पर सूचना दें। पुलिस महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों में त्वरित व कठोरतम कानूनी कार्रवाई के लिए सदैव तत्पर है।

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[मीडिया हेतु अनिवार्य निर्देश: लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धारा 33(7)/भारतीय न्याय संहिता की धारा 72 के तहत पीड़िताओं के नाम, फोटो, विद्यालय अथवा परिवार की ऐसी कोई भी पहचान उजागर करना पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय अपराध है।]

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