Home Blog सितार की सुरमयी तान से सजी चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या

सितार की सुरमयी तान से सजी चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या

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डॉ. लवली शर्मा ने शास्त्रीय संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

रायगढ़, 41वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर समारोह में डॉ. लवली शर्मा ने सितार वादन की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में सितार के मधुर सुरों और शास्त्रीय संगीत की गहराई ने समारोह के माहौल को सुरमयी बना दिया। दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति का आनंद लेते हुए तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।

उत्तर प्रदेश में जन्मीं डॉ. लवली शर्मा ने महज 15 वर्ष की आयु में श्रीमती वीणा चंद्रा से सितार की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न गुरुओं से प्रशिक्षण लिया और आगे चलकर प्रसिद्ध गिटार वादक पंडित बृज भूषण काबरा की शिष्या बनीं। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संगीत में एम.ए. गोल्ड मेडल के साथ तथा बड़ौदा विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

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वे संगीत में डी.लिट्ट की उपाधि भी हासिल कर चुकी हैं। डॉ. लवली शर्मा ने देश-विदेश के अनेक मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। वे ऑल इंडिया रेडियो और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की सूचीबद्ध सितार वादक हैं। उन्हें ‘कला भूषण’ सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान में वे आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में सितार की प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

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