रायगढ़ में 1,223 मोतियाबिंद ऑपरेशन, 19,492 स्कूली बच्चों की हुई नेत्र जांच
रायगढ़, किसी के लिए साफ दिखाई देना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन आंखों की रोशनी कमजोर होने या मोतियाबिंद के कारण दृष्टि खोने वाले व्यक्ति के लिए यही रोशनी उसके जीवन को फिर से आसान बना देती है। रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं ऐसे ही लोगों के जीवन में बदलाव ला रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप एवं कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदशन मे जिले में मोतियाबिंद के मरीजों के उपचार के लिए लगातार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि जिले में 7 हजार मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 1,223 मरीजों के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। निःशुल्क उपचार मिलने से मरीजों को दृष्टि संबंधी परेशानी से राहत मिली है।

जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों का भी हुआ उपचार
जिले में जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित 7 बच्चे चिन्हांकित किए गए। इनमें से 4 बच्चों का सफल ऑपरेशन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मीना पटेल द्वारा किया जा चुका है। कम उम्र में बीमारी की पहचान कर समय पर उपचार मिलने से इन बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद मजबूत हुई है।
19,492 बच्चों की जांच, 1,479 में मिला दृष्टि दोष
स्कूली बच्चों की आंखों की जांच को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग लगातार काम कर रहा है। जिले की 647 माध्यमिक शालाओं के 19,492 बच्चों का नेत्र परीक्षण किया गया। जांच में 1,479 बच्चे दृष्टि दोष से पीड़ित पाए गए। इन बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
नेत्रदान के लिए भी लोगों को किया जा रहा जागरूक
सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल ने बताया कि नेत्र स्वास्थ्य के साथ नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी किया जा रहा है। सत्र 2025-27 में 2 व्यक्तियों द्वारा नेत्रदान किया गया है। यह सेवा किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकती है। इन सेवाओं को उपलब्ध कराने में शासकीय किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चिकित्सक दल में डॉ. मीना पटेल, डॉ. सोनाली अग्रवाल एवं डॉ. आर.एम. मेश्राम शामिल हैं। वहीं एन.के. परिकर, नेत्र सहायक अधिकारी, ओटी स्टाफ एवं वार्ड स्टाफ द्वारा भी निरंतर सहयोग दिया जा रहा है।



