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सेवा की कहानी: मनरेगा से बने तालाब ने खोली मछली पालन और सिंचाई की राह

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लिटाईपाली के अग्नि कुमार सिदार ने श्रम से संवारा तालाब, अब मछली पालन और खेती में मिल रहा लाभ

रायगढ़, कभी रोजगार के लिए किए गए श्रम का परिणाम आज स्थायी आजीविका का आधार बन गया है। रायगढ़ के पुसौर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत लिटाईपाली के अग्नि कुमार सिदार के लिए मनरेगा योजना से निर्मित तालाब इसी बदलाव की कहानी कहता है। तालाब निर्माण में उन्होंने स्वयं श्रम किया और अब इसी तालाब में मछली पालन के साथ खेतों की सिंचाई भी कर रहे हैं।

अग्नि कुमार बताते हैं कि मनरेगा के तहत तालाब का निर्माण कराया गया। तालाब को पूरा करने में उन्होंने स्वयं भी काम किया। तालाब तैयार होने के बाद उन्होंने इसमें मछली पालन शुरू किया। वर्तमान में तालाब में कतला सहित अन्य मछलियां डाली गई हैं, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का रास्ता तैयार हुआ है। तालाब का पानी खेती के लिए भी उपयोग में आ रहा है। सिंचाई के लिए पानी मिलने से खेतों में खेती करना आसान हुआ है। वहीं तालाब की मेड़ को भी उन्होंने उपयोगी बनाया है। मेड़ के आसपास अरहर और गेंदे के फूल लगाए गए हैं। अग्नि कुमार कहते हैं कि योजना से उन्हें रोजगार के साथ ऐसी परिसंपत्ति मिली, जिसका लाभ लगातार मिल रहा है। उनके लिए यह तालाब अब मछली पालन, सिंचाई और आजीविका का सहारा बन गया है। उन्होंने इसके लिए शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।

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कौन ले सकता है डबरी निर्माण का लाभ

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत निजी डबरी निर्माण के लिए आवेदक के पास वैध जॉब कार्ड और स्वयं की कृषि भूमि होना जरूरी है। इच्छुक किसान ग्राम पंचायत या रोजगार सहायक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के साथ आधार कार्ड, जॉब कार्ड और भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं। मनरेगा के तहत बनने वाली ऐसी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ खेती और अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।

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