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बारिश थम रही है, सेवा का संकल्प जारी है : धमतरी में हर घर तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की निगरानी

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स्रोत से घर तक गुणवत्ता की पहरेदारी — जल जांच, क्लोरीनेशन, टंकियों की सफाई और ग्राम स्तर पर जल बहिनियों की भागीदारी

  •  शशिरत्न पाराशर, उप संचालक 

धमतरी,

Ro.No - 13998/148

मानसून अब अंतिम दौर में है। बीते दिनों हुई भारी बारिश ने जहां खेतों और जलस्रोतों को पानी से भर दिया, वहीं बारिश के बाद पेयजल स्रोतों की स्वच्छता और गुणवत्ता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत भी बढ़ गई है। इसी जिम्मेदारी को सेवा का संकल्प मानते हुए धमतरी जिले में ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है कि बारिश के बाद किसी परिवार तक ऐसा पानी न पहुंचे, जो उसके स्वास्थ्य के लिए खतरा बने। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के निर्देशानुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी, आवश्यकतानुसार क्लोरीनेशन, जल टंकियों की साफ-सफाई और जल गुणवत्ता परीक्षण लगातार किया जा रहा है।

यह पहल केवल जलापूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘स्रोत से घर तक सुरक्षित पानी और हर बूंद में भरोसा’ की सोच के साथ संचालित की जा रही है।

बारिश के बाद पानी की गुणवत्ता पर विशेष नजर

मानसून के दौरान बारिश, जलभराव और सतही जल के प्रवाह के कारण पेयजल स्रोतों के दूषित होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में डायरिया, हैजा, टाइफाइड, पेचिश तथा हेपेटाइटिस-ए एवं ई जैसे जलजनित रोगों की रोकथाम के लिए समय रहते सावधानी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों और जलापूर्ति व्यवस्थाओं की सतत निगरानी की जा रही है। आवश्यकता के अनुसार जलस्रोतों का क्लोरीनेशन, जल टंकियों की सफाई एवं रखरखाव तथा पानी की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा रही है।

धमतरी में पेयजल व्यवस्था का मजबूत आधार

ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिले में व्यापक पेयजल अधोसंरचना विकसित की गई है। जिले में 9,981 हैंडपंप, 16,024 पेयजल स्रोत और 548 जल टंकियां उपलब्ध हैं।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत जलापूर्ति योजनाओं में पानी के डिसइंफेक्शन के लिए 529 क्लोरिनेटर मशीनें स्थापित की गई हैं। जिले में 718 नल जल योजनाएं और 2 समूह जल प्रदाय योजनाएं संचालित हैं।

इन व्यवस्थाओं के माध्यम से यह प्रयास किया जा रहा है कि ग्रामीण परिवारों तक नल से पहुंचने वाला पानी केवल उपलब्ध ही न हो, बल्कि स्वच्छ, सुरक्षित और निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप भी हो।

हर गांव में जल गुणवत्ता की ‘पहरेदार’ हैं जल बहिनियां

पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था को केवल विभागीय अमले तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें ग्राम स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

जिले के 623 ग्रामों में Field Test Kit (FTK) उपलब्ध कराई गई है। संबंधित ग्रामों में पांच-पांच जल बहिनियों को FTK के माध्यम से जल परीक्षण का प्रशिक्षण दिया गया है। इस तरह 3,110 जल बहिनियां ग्राम स्तर पर पेयजल गुणवत्ता की प्राथमिक निगरानी में सहभागी बनी हैं।

यह व्यवस्था सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को मजबूत करती है, जिसमें सरकारी व्यवस्था के साथ समुदाय की भागीदारी को भी सेवा की शक्ति माना गया है।

हर सप्ताह 120 घरों के पानी की जांच

मानसून विशेष अभियान के अंतर्गत जिले के चारों विकासखंडों—कुरूद, मगरलोड, धमतरी एवं नगरी—से प्रत्येक सप्ताह 30-30 घरेलू जल नमूने लिए जा रहे हैं। इस प्रकार प्रत्येक सप्ताह कुल 120 घरेलू जल नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण किया जा रहा है।

इसके साथ ही प्रत्येक सप्ताह 15 जल टंकियों की निगरानी भी की जा रही है।

इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है कि निगरानी केवल जलस्रोत तक सीमित न रहे, बल्कि स्रोत से टंकी और टंकी से घर तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता पर भी नजर बनी रहे।

529 क्लोरिनेटर मशीनें : पानी की सुरक्षा की एक और कड़ी

जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले में स्थापित 529 क्लोरिनेटर मशीनों के माध्यम से ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं में पानी के डिसइंफेक्शन की व्यवस्था की गई है। इन मशीनों में नमक एवं पानी के घोल को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से गुजारकर सक्रिय क्लोरीन तैयार की जाती है। निर्धारित मात्रा में इसका उपयोग जलापूर्ति प्रणाली में किया जाता है, जिससे पानी में मौजूद संभावित हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।

ग्राम स्तर पर जांच, समस्या दिखे तो तत्काल कार्रवाई

FTK के माध्यम से प्रशिक्षित जल बहिनियां विभिन्न पेयजल स्रोतों से नमूने लेकर निर्धारित मानकों के अनुसार प्राथमिक जांच करती हैं। इससे जल गुणवत्ता से जुड़ी संभावित समस्या की प्रारंभिक स्तर पर पहचान संभव होती है।

यदि जांच में किसी प्रकार की गुणवत्ता संबंधी समस्या सामने आती है, तो संबंधित विभागीय अमले द्वारा आवश्यकतानुसार आगे की जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।

यानी व्यवस्था का उद्देश्य केवल ‘पानी की जांच’ करना नहीं, बल्कि ‘समस्या की पहचान से समाधान तक सेवा’ सुनिश्चित करना है।

सेवा संकल्प का अर्थ—सुविधा के साथ सुरक्षा और सम्मान

शुद्ध पेयजल किसी परिवार के लिए केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षित जीवन का आधार है। इसलिए सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना प्रशासन की संवेदनशीलता और जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

ग्रामीण परिवारों के घर तक नल से पानी पहुंचने के साथ यह भरोसा भी पहुंचे कि यह पानी सुरक्षित है, इसकी गुणवत्ता की जांच हो रही है और किसी समस्या की स्थिति में व्यवस्था तत्परता से उसके समाधान के लिए मौजूद है।

‘हर बूंद में भरोसा’ की ओर बढ़ता धमतरी

मानसून समाप्त होने की ओर है, लेकिन सुरक्षित पेयजल की जिम्मेदारी निरंतर बनी हुई है। जिला प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, ग्राम पंचायतों और जल बहिनियों के समन्वित प्रयासों से पेयजल गुणवत्ता की बहुस्तरीय निगरानी की जा रही है।

सेवा संकल्प अभियान का यही संदेश है—सेवा केवल सुविधा पहुंचाने का नाम नहीं, बल्कि उस सुविधा की गुणवत्ता, सुरक्षा और निरंतरता की जिम्मेदारी निभाने का भी नाम है।

धमतरी में यह संकल्प ‘हर घर तक पानी’ से आगे बढ़कर ‘हर घर तक सुरक्षित पानी’ का रूप ले रहा है। बारिश के बाद की चुनौती के बीच यही प्रयास ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

जिला प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें और उन्हें कचरे, गंदगी एवं अन्य प्रदूषक पदार्थों से दूषित होने से बचाएं। पानी के रंग, गंध अथवा स्वाद में असामान्य परिवर्तन महसूस होने पर तत्काल ग्राम पंचायत या संबंधित विभागीय अमले को इसकी सूचना दें।

स्वच्छ पानी—स्वस्थ परिवार, सुरक्षित गांव और सशक्त समाज की बुनियाद है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से धमतरी इसी विश्वास को व्यवहार में उतार रहा है।

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