रायगढ़, शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, रोचक और बाल-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से संकुल केंद्र काशीचुवा द्वारा तैयार शैक्षिक पत्रिका ‘शैक्षिक सृजन’ सत्र 2026-27 का विमोचन जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.एन. साहू एवं जिला मिशन समन्वयक श्री आलोक स्वर्णकार ने किया। पत्रिका के माध्यम से शिक्षकों के शैक्षिक अनुभवों, रचनात्मक गतिविधियों और नवाचारों को साझा करने के साथ विद्यालयों में बेहतर शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है। ‘शिक्षा, संवेदना, नवाचार-बेहतर कल’ ध्येय वाक्य पर आधारित यह पत्रिका शिक्षकों को अपने सफल प्रयोगों और उपयोगी शिक्षण विधियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सृजनशीलता को बढ़ावा देना है, ताकि सीखने-सिखाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.एन. साहू ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करना भी है। ‘शैक्षिक सृजन’ के माध्यम से शिक्षक गतिविधि आधारित शिक्षण, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। इससे अन्य शिक्षकों को भी उपयोगी प्रयोग अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। जिला मिशन समन्वयक श्री आलोक स्वर्णकार ने कहा कि शिक्षकों के नवाचार विद्यार्थियों की क्षमताओं को निखारने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब शिक्षक एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं, तो विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है। उन्होंने इस पहल को शैक्षिक सुधार की दिशा में उपयोगी प्रयास बताया।

संकुल शैक्षिक समन्वयक श्री भुवन पटेल ने कहा कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण विकसित करना जरूरी है, जहां बच्चे बिना झिझक प्रश्न पूछें, अपनी जिज्ञासा व्यक्त करें और गतिविधियों के माध्यम से सीखें। खेल, प्रयोग, पुस्तकालय, कला, सांस्कृतिक गतिविधियों और तकनीक के उपयोग से विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अभिभावकों, शाला प्रबंधन समिति और समुदाय की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। संकुल केंद्र काशीचुवा की यह पहल शिक्षकों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान और नई शिक्षण विधियों को अपनाने की संस्कृति को बढ़ावा देगी।


