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कांकेर पैलेस में हेरिटेज टूरिज्म को मिली नई दिशा, युवराज श्री जयप्रताप से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की टीम और इंफ्लुएंसर्स की सार्थक चर्चा

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राज्य के विभिन्न जिलों के डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने कांकेर के छिपे पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार और विरासत पर्यटन के संवर्धन पर साझा किए सुझाव

रायपुर, 24 जुलाई 2026

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छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार नवाचारपूर्ण प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में कांकेर के ऐतिहासिक कांकेर पैलेस में आज छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की टीम तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स (इंफ्लुएंसर्स) ने कांकेर पैलेस के युवराज श्री जयप्रताप से सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात प्रदेश में हेरिटेज टूरिज्म को नई दिशा देने, कांकेर की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यापक पहचान दिलाने तथा बस्तर अंचल की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही।

भेंट के दौरान युवराज श्री जयप्रताप ने कांकेर रियासत के गौरवशाली इतिहास, राजमहल की स्थापत्य कला, स्थानीय संस्कृति तथा क्षेत्र की विशिष्ट परंपराओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कांकेर केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और सांस्कृतिक विविधता के कारण भी पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने कहा कि विरासत स्थलों का संरक्षण और उनका प्रभावी प्रचार-प्रसार पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है।

बैठक में विशेष रूप से कांकेर और आसपास के ऐसे कम चर्चित पर्यटन स्थलों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन अभी तक वे व्यापक स्तर पर पर्यटकों की पहुंच से दूर हैं। इन स्थलों को डिजिटल माध्यमों के जरिए देश-विदेश के यात्रियों तक पहुंचाने, उनकी विशिष्टताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए अनेक सुझाव सामने आए। यह भी विचार किया गया कि प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और विरासत पर्यटन को एकीकृत रूप से विकसित कर कांकेर को एक बहुआयामी पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कम चर्चित लेकिन अत्यंत मनोहारी पर्यटन स्थलों, स्थानीय लोक संस्कृति, जनजातीय जीवन, पारंपरिक कला, खान-पान और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक वीडियो, फोटोग्राफी और डिजिटल स्टोरीटेलिंग के माध्यम से देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।

बैठक के दौरान हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पर्यटन आधारित रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। इंफ्लुएंसर्स ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके डिजिटल मंचों के माध्यम से कांकेर और समूचे बस्तर अंचल की अनूठी पर्यटन पहचान लाखों लोगों तक पहुंचेगी और प्रदेश के पर्यटन को नई गति मिलेगी।

युवराज श्री जयप्रताप ने भी छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने का यह प्रयास निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय विरासत, इतिहास और प्राकृतिक धरोहरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए तो कांकेर आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख हेरिटेज पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड इन दिनों राज्य के विभिन्न जिलों से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के साथ बस्तर पर्यटन परिचय यात्रा का आयोजन कर रहा है। इस यात्रा के माध्यम से बस्तर संभाग के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके। यह पहल डिजिटल माध्यमों की शक्ति का उपयोग करते हुए छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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