Home Blog तंबूरा थामे कपालिक शैली में गूंजी पंडवानी, पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने...

तंबूरा थामे कपालिक शैली में गूंजी पंडवानी, पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने मोहा मन

0
महाभारत के प्रसंगों के गायन से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति से कराया परिचित

रायगढ़, 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के पहले दिन पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने पंडवानी की प्रस्तुति दी। उन्होंने कपालिक शैली में हाथ में तंबूरा लेकर महाभारत के विभिन्न प्रसंगों का ओजस्वी और भावपूर्ण गायन किया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। डॉ. उषा बारले ने अपनी विशिष्ट शैली में महाभारत के प्रसंगों को जीवंत करते हुए दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा से परिचित कराया। द्रौपदी चीरहरण, कीचक वध और ‘अमर कथा’ जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

कार्यक्रम में डॉ. उषा बारले की दोनों पुत्रियों ने छत्तीसगढ़ महतारी की आरती-पूजन का गायन किया। इसके बाद बाबा गुरु घासीदास के संदेशों पर आधारित गीतों के साथ पंथी नृत्य की प्रस्तुति हुई। पंथी नृत्य ने पूरे रामलीला मैदान को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से सराबोर कर दिया।

Ro.No - 13954/82
सात वर्ष की उम्र से कर रहीं पंडवानी

डॉ. उषा बारले ने सात वर्ष की उम्र में स्व. मेहत्तर दास बघेल से पंडवानी गायकी की शिक्षा लेना शुरू किया था। उन्होंने डॉ. तीजन बाई से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों में भी पंडवानी की प्रस्तुतियां देकर उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को पहचान दिलाई है। पंडवानी के साथ वे पंथी गीत, सतनाम भजन और चौका आरती जैसी लोक विधाओं में भी पारंगत हैं। लोककला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here