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मत्स्य पालन से बदली तस्वीर, बबीता बघेल का ‘नई दिशा’ समूह बना मिसाल

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Fisheries Transform the Landscape: Babita Baghel’s ‘Nai Disha’ Group Sets an Example

15 महिलाओं को मिला रोजगार, शिविर में मिला आइस बॉक्स, बढ़ी आय के अवसर

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रायगढ़, खरसिया विकासखंड के ग्राम तेलीकोट में महिलाओं ने मत्स्य पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। बबीता बघेल के नेतृत्व में संचालित “नई दिशा महिला स्व-सहायता समूह” की 15 महिलाएं आज संगठित प्रयासों से सफल स्वरोजगार का मॉडल बन चुकी हैं। समूह की महिलाएं तालाब प्रबंधन से लेकर मछली उत्पादन और बाजार में बिक्री तक की जिम्मेदारी स्वयं संभाल रही हैं। शासकीय योजनाओं के तहत मिले सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने आधुनिक पद्धति से मत्स्य पालन अपनाया है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
खरसिया में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में समूह की महिलाओं को मछली सुरक्षित रखने और परिवहन के लिए आइस बॉक्स प्रदान किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने महिलाओं से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। बता दे कि मत्स्य पालन से समूह की महिलाओं को हर वर्ष बेहतर आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। वे अब परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। समूह द्वारा उत्पादित मछलियों की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी की जा रही है, जिससे आय के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। आर्थिक मजबूती के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता भी बढ़ी है। वे अब न केवल अपने निर्णय स्वयं ले रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। समूह भविष्य में अपने कार्य का विस्तार कर अधिक महिलाओं को जोड़ने की दिशा में प्रयासरत है। महिलाओं ने इस उपलब्धि के लिए शासन एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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