देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। SC ने कहा एसआईआर प्रक्रिया में कोई खामी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है, अपनी शक्तियों के बाहर नहीं. पूरी प्रक्रिया को गैर-संवैधानिक करार नहीं दे सकते.’ सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच बुधवार (27 मई) को अपना फैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने ECI के बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने फैसला दिया है कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी कहकर रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वोटर लिस्ट के सामान्य रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है. कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है. कोर्ट ने आगे कहा, ‘यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है.’
चुनाव आयोग अपने अधिकार के दायरे में ही रहा’
अदालत के मुताबिक यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की जिम्मेदारी को मजबूत करती है. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर काम नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि SIR प्रक्रिया में लोगों को अपनी बात रखने के कई मौके दिए गए.
‘SIR प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए SIR प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया से अलग है. अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के उद्देश्य से जुड़ी हुई है. कोर्ट ने कहा कि कानून चुनाव आयोग को किसी भी समय विशेष पुनरीक्षण कराने का अधिकार देता है, इसलिए SIR को अवैध नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून और उससे जुड़े नियमों की जगह नहीं लेती.
इसमें कुछ भी मनमाना नहीं- सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने कहा कि नोटिस देने और सुनवाई जैसे जरूरी सुरक्षा उपाय इस प्रक्रिया में मौजूद थे. कोर्ट के मुताबिक SIR का मकसद वोटर लिस्ट को सही, पूरी और भरोसेमंद बनाना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में अपनाए गए कदम जरूरत से ज्यादा कठोर नहीं हैं. अदालत ने माना कि लोगों को मनमाने तरीके से वोटर लिस्ट से बाहर होने से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए.
कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव आयोग केवल वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने तक सीमित फैसला ले सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं कर सकता,
अदालत ने कहा कि अगर किसी का नाम नागरिकता के आधार पर हटाया जाता है, तो उस मामले का अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकरण करेगा. कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग की पूरी प्रक्रिया कानून के मुताबिक है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों का वर्गीकरण तर्कसंगत आधार पर किया गया और इसका सीधा संबंध वोटर लिस्ट की शुद्धता बनाए रखने से है.



