Home Blog सरयू साहित्य का पुरातत्व धरोहर अध्ययन अभियान,,लक्ष्मणा धाम का दर्शन इस दिशा...

सरयू साहित्य का पुरातत्व धरोहर अध्ययन अभियान,,लक्ष्मणा धाम का दर्शन इस दिशा मे अहम पायदान

0

Archaeological heritage study campaign of Saryu literature, visit to Lakshmana Dham is an important step in this direction

सिरपुर से प्रारंभ इस अभियान के तहत अब तक विभिन्न स्थलों का दर्शन

Ro.No - 13759/82

सौरभ बरवाड़/भाटापारा– पुरातत्व महज इतिहास नहीं वरन वह प्रेरणा है जो वर्तमान को सशक्त बनाती है एवं अतीत के वैभव का ऐहसास कराती है,इन धरोहरों मे वर्तमान के लिए बहुत कुछ प्रदान करने की क्षमता रहती है,नगर की रचनात्मक संस्था सरयू साहित्य परिषद द्वारा इन्ही पुरातात्विक धरोहरों की महत्ता को समझते हुए इनके दर्शन एवं अध्ययन का अभियान प्रारंभ किया गया है।

सिरपुर से अभियान का श्रीगणेश

धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ महत्वपूर्ण और मौलिक प्रयोगों के महत्व को अपने मे समाहित किए हुए भारतीय कला के इतिहास में सिरपुर का विशेष स्थान है,सरयू साहित्य परिषद द्वारा अपने अभियान का शुभारंभ इसी स्थल से किया गया,एवं इस स्थल की पुरातात्विक एवं आस्था की महत्ता का अध्ययन एवं दर्शन के उपरांत राजिम गरियाबंद पाण्डूका भोरमदेव जैसे विभिन्न धार्मिक आस्था एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों का अध्ययन करते हुए इनसे जुड़ी जानकारियां एवं प्रेरणा को संकलित किया गया,

लक्ष्मणा धाम का दर्शन अध्ययन

सरयू साहित्य परिषद के अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा के नेतृत्व मे संचालित हो रहे इस महा अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी भाटापारा क्षेत्र स्थित ढाबाडीह लक्ष्मणा धाम के दर्शन अध्ययन के रुप मे भी संपन्न हुई परिषद के अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा एवं मुकेश शर्मा द्वारा साधक की स्मृति स्थल लक्ष्मणा धाम पंहुच कर उनसे जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी संकलित की गयी,लगभग सौ वर्षों से अधिक का इतिहास अपने मे समेटे लक्ष्मणा धाम के संबंध मे स्थानीय रुपेश मिश्रा द्वारा बताया गया कि एक समय मे यहां घुमक्कड़ भटरी जाति का आना जाना था एवं लंबे समय तक वे यहां ठहरते थे,उन्ही के साथ उनके गुरु लक्ष्मण भी साथ रहते थे,जो अत्यंत साधक किस्म के व्यक्ति थे,सदैव कांवड़ के साथ चलने वाले गुरु जी के कांवड़ के एक हिस्से मे देवी देवताओं की प्रतिमा होती थी,उनकी मृत्यु के बाद यहीं उन्हे दफनाया गया एवं उनकी पूजित मूर्तियों की स्थापना की गयी और यही लक्ष्मणा धाम के रुप मे ख्याति को प्राप्त हुई,उन्होने यह भी बताया कि मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध इस स्थल की बड़ी महत्ता है दूर दूर से लोग लक्ष्मणा धाम दर्शन को पंहुचते है तथा छेर छेरा पुन्नी के अवसर पर यहां भव्य मेला का आयोजन होता है,रोहरा से लगभग पांच किलोमीटर दूर धर्म एवं अध्यात्म के इस महत्वपूर्ण स्थल मे सड़क निर्माण के बाद पंहुच और भी सुगम हो गया है।

प्रेरणा का प्रसार एवं जागरण अहम उद्देश्य

पुरातत्व एवं धर्म अध्यात्म के महत्व के स्थलों के दर्शन एवं अध्ययन के उद्देश्य के संबंध मे परिषद के अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा से चर्चा करने पर उन्होने बताया कि इस अभियान के पीछे यही उद्देश्य है कि पुरातत्व एवं धर्म अध्यात्म से जुडे स्थलों को जनमानस के बीच प्रचारित करना तथा लोगों को इससे जोड़ना जिससे नयी पीढ़ी इससे प्रेरणा ग्रहण कर सके,इसके अलावा इन स्थलों के उन्नयन के लिए शासन प्रशासन का ध्यान भी आकृष्ट कराना भी अहम उद्देश्य बताया गया,उन्होने यह भी कहा कि छत्तीसगढ के विभिन्न पुरातात्विक एवं धर्म अध्यात्म के महत्व के स्थलों का अध्ययन एवं दर्शन निरंतर जारी रहेगा तथा इससे जुड़ी जानकारियों को पुस्तक के रुप मे लिपीबध्द किया जायेगा जिससे यह अहम दस्तावेज के रुप मे सदैव जीवंत बने रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here